ये मिजाज कागजी,
हमारे-तुम्हारे रबाब कागजी
समय की जुबा
समय का लतीफ,
ये हमारे तुम्हारे
ज़ज्बात कागजी,
मिले हैं तुमसे
मिलेंगे कहाँ फिर,
ये खुदा हाफिजों
का रिवाज कागजी!
तुम पर है अधिकार तुम्हारे होने का चलने का, तुम्हारे बातें मुझसे करने का और फिर तुमसे मिलने का, यह बोलो और फिर शांत रहो मैं सोचूँ और तुम ...