खुद से जिम्मेवारी,
ये मानवता, ये हुजूम,
ये देश, ये दफ्तर
ये खानदान, ये शहर,
ये सफाई, कुछ कमाई
एडमिशन और पढ़ाई,
आज की क्लास
कल सुबह का ऑडिट,
उनका टिकट
इनका इतिहास!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...