ये मिजाज कागजी,
हमारे-तुम्हारे रबाब कागजी
समय की जुबा
समय का लतीफ,
ये हमारे तुम्हारे
ज़ज्बात कागजी,
मिले हैं तुमसे
मिलेंगे कहाँ फिर,
ये खुदा हाफिजों
का रिवाज कागजी!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...