ये मिजाज कागजी,
हमारे-तुम्हारे रबाब कागजी
समय की जुबा
समय का लतीफ,
ये हमारे तुम्हारे
ज़ज्बात कागजी,
मिले हैं तुमसे
मिलेंगे कहाँ फिर,
ये खुदा हाफिजों
का रिवाज कागजी!
फैसला हक में हमारे कर दो आज इंसान बनकर, कब तक रहोगे मौन मन मे महज चित्कार कर, जो है सभी स्वीकार उसको स्याह कर दो, आज लोगों की जुबाँ की राह ...