Sunday, 29 March 2026

किसने छोड़ा?

किसने छोड़कर हाथ मेरा
मुझपर कर दिया खिलवाड़,
किसने देखकर मुझको किया
सबसे पहले ही इंकार, 

या किसीको मैंने किया
जिंदगीभर दुश्वार, 
और किसी छोटी वजह पर
किया बड़ा पलटवार, 

ये किसने किया किसपर 
छोड़कर उपकार?

धृतराष्ट्र

अंधा है बैठा 
एक धृतराष्ट्र,
आज फिर
समाज में, 
लोकतंत्र के 
विशाल काज में,
मुँह में गुटका है 
और है आखों में 
एक तिरस्कार, 
गर्दन उठा कर 
देखता वो 
पांडवों की सर्कार, 
कुछ बोलता नहीं 
पर घोलता ज़हर, 
मंच से इधर जुटा कर 
संजयों की कतार,
ना वोट डालता
ना आवाज ही करता
फुंकार करता जोर से
दहाड़ता घर भर,
घुसमुसाया-फुसफुसाया
कसता सभी पर तंज,
आज का धृतराष्ट्र 
खुद से खेलता शतरंज!

Monday, 16 March 2026

अधिकार

तुम पर है अधिकार 
तुम्हारे होने का चलने का, 
तुम्हारे बातें मुझसे करने का 
और फिर तुमसे मिलने का, 

यह बोलो और फिर शांत रहो
मैं सोचूँ और तुम कर ही दो, 
मेरे रोने से पहले मेरे 
आँसू से मोती हाथ में लो, 

मैं ले लूँ तुमको आगोश धरूँ
मैं रात रागिनी बन महकूँ,
मैं अधरों के अंतर मे शामिल 
कर तुमको कुछ ना बोलूँ,
मैं ओढ़ तुम्हे सीपी जैसा
अपने को मोती कर लूँ,

मैं रात जगूँ, दिन भर सो लूँ
मै आग कहूँ और जल-नेत्र भरूँ
मैं सुबक-सुबक कर हाथ धरूँ
तुमपर सारे इल्ज़ाम रखूँ,
अपशब्दों की माला चुनकर 
रोज सुबह खाने में दूँ,

ना कलम रखूँ, ना बटन कसूँ
ऑफिस को होठों से धर लूँ,
बिंदी मे देखो मेरे तुम 
सूर्य-ग्रहण सा अंधकार, 
चांद रात की चादर से
मैं अपने तकिये मे कढ़ दूँ,

मैं जो चाहूँ तुमसे पा लूँ 
नभ-सा मेरा विस्तार प्रिये,
अपनी बगिया से उड़ आई
हमसफ़र मेरे, हमनफज मेरे,
तुम गगन, पवन से अंतहीन 
मेरी पंखों का अधिकार प्रिये!


Wednesday, 11 March 2026

कुछ बात

कुछ बात नहीं है 
कहने को 
वो चुप हैं, मैं मौन हूँ, 
कुछ नहीं हैं 
अलविदा के शब्द,
वो हैं और मैं
बस रहने को,
खैर किसका पूछें
की खैरियत कहते नहीं
सहने को,
आखों तक न पहुँची हँसी,
खिलखिलाहट है 
बस बहने को,
तुम और मैं 
अजनबीं हैं और 
हमसफर हैं बस चलने को!

किसने छोड़ा?

किसने छोड़कर हाथ मेरा मुझपर कर दिया खिलवाड़, किसने देखकर मुझको किया सबसे पहले ही इंकार,  या किसीको मैंने किया जिंदगीभर दुश्वार,  और किसी छोट...