Wednesday, 11 March 2026

कुछ बात

कुछ बात नहीं है 
कहने को 
वो चुप हैं, मैं मौन हूँ, 
कुछ नहीं हैं 
अलविदा के शब्द,
वो हैं और मैं
बस रहने को,
खैर किसका पूछें
की खैरियत कहते नहीं
सहने को,
आखों तक न पहुँची हँसी,
खिलखिलाहट है 
बस बहने को,
तुम और मैं 
अजनबीं हैं और 
हमसफर हैं बस चलने को!

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