एक और निवाला,
एक और चुस्की
एक और करवट,
एक थोड़ी झंझट
एक और जुगाड़,
एक आलस्य भरी अंगड़ाई
एक छोटी-सी चतुराई,
एक मोहल्ले का त्यौहार
एक हाथ पकड़े प्यार,
एक समस्या एक समाधान,
एक पंचायत, एक प्रधान
एक घर, एक कर्म
एक नाम, एक धर्म!
फैसला हक में हमारे कर दो आज इंसान बनकर, कब तक रहोगे मौन मन मे महज चित्कार कर, जो है सभी स्वीकार उसको स्याह कर दो, आज लोगों की जुबाँ की राह ...