Wednesday, 31 July 2019

गुमराह

मै फिर ख़ुद से
भटक गया था,
तुमने देखकर
बदल गया था।

मैंने सोचा
जिसको चाहा,
मैंने पाया
जिसको त्यागा,
कुछ और सोच
मै पिघल गया था।

मैंने तुमको
हँसते देखा,
हरकत करते
तुमको देखा

चंचल चितवन
रूप देखकर
मई भी नाचने
निकल गया था

मै फिर ख़ुद से
भटक गया था।

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