क्यूँ अंधेरा कर रहे हो तुम?
चिरागों की चमक को
क्यूँ सवेरा कह रहे हो तुम?
हमारे खादी पहनने से
'बापू' साँस लेते हैं
हमारे साँस लेने पर
बखेड़ा कर रहे हो तुम?
तुम पर है अधिकार तुम्हारे होने का चलने का, तुम्हारे बातें मुझसे करने का और फिर तुमसे मिलने का, यह बोलो और फिर शांत रहो मैं सोचूँ और तुम ...