Saturday, 13 July 2024

घर

एक घर मे
जाकर सो जाए,
हम घर मे 
जाकर पड़ जाए,
घर मेरे मन का 
बना हुआ,
घर मेरे मन का
सजा हुआ,
घर मेरा 
सुगंध भरा,
घर मेरा-सा
आधा-पौना,
घर का कोना-कोना ऐसा
पालने मे झूलने के जैसा,
घर की दीवार ऑंचल जैसी
कोई गोद सरीखी बीछी ज़मी,

यात्रा मेरी लम्बी-चौड़ी
पर घर पर जाकर थमी रुकी!



No comments:

Post a Comment

किसने छोड़ा?

किसने छोड़कर हाथ मेरा मुझपर कर दिया खिलवाड़, किसने देखकर मुझको किया सबसे पहले ही इंकार,  या किसीको मैंने किया जिंदगीभर दुश्वार,  और किसी छोट...