Sunday, 28 July 2024

बोझ

एक फोन का बोझ है
बारिश मे भींगने से डरा,
कुछ क्षण को कौतुहल 
कुछेक बूँद को 
थामने की ललक,

कुछ पकड़ मेरी
कुछ-कुछ समय 
और विधान की,
कुछ माथे का तिलक 
कुछ परिवेश
कुछ परिधान की,

एक बोझ मन का
एक चाह मन की,
एक बोझ कंधे का
एक उठे हुए पंखों का!


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