Thursday, 17 October 2024

मरघट

हम मिले-जुले
एक मरघट पर,
हम बात किए 
कुछ मरघट पर,
माँ गंगा की आरती हुई 
हम पढ़ें मंत्र
उस मरघट पर,

वो सब छोड़ 
किनारे बैठे थे,
हम पाने
दरिया आए थे,
कुछ शाम की
रूंधी भाषा में,
हम बातें करते चले गए,
हम चले परस्पर मरघट से!


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