Sunday, 14 June 2026

ठिठोली

झूला झूले रज का 
कित टूटे और छूटे
डोरी प्रिय संग का,
यह उच्छ्वास
पर निःश्वास,
दोलन ऊपर को
अंतर मे उल्लास,
भय और रोमांच 
करते नृत्य 
जुगलबंदी सदृश्य,
नयनों का विश्वास,
अधरों पर ठिठोली
प्रिय से कर मुंहजोरी,
यह नैसर्गिक एहसास 
मेरी-तेरी चित्चोरी!



दो बखत

दो बार बैठे
दो बखत,
दो जून की रोटी को,
दो आंखों मे आस
दो बच्चों की प्यास, 
दो घंटे बीते छान
दो कदमों पर ध्यान,
आएंगे कैसे बाट
मेरे संकटमोचन,
उनके लिए वेतन 
मेरे जीवन का सार!



ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...