कित टूटे और छूटे
डोरी प्रिय संग का,
यह उच्छ्वास
पर निःश्वास,
दोलन ऊपर को
अंतर मे उल्लास,
भय और रोमांच
करते नृत्य
जुगलबंदी सदृश्य,
नयनों का विश्वास,
अधरों पर ठिठोली
प्रिय से कर मुंहजोरी,
यह नैसर्गिक एहसास
मेरी-तेरी चित्चोरी!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...