Wednesday, 21 February 2024

मुकेश

चुल्लू भर मांग कर 
पीने का हक है,
मुकेश को खुल कर 
जीने का हक है,

मुकेश महफ़िल में 
नाचना चाहता है,
ये नशे में कुछ 
बाचना चाहता है,
मुकेश को महफिल में 
होने का हक है,

मुकेश अभी रूम 
नहीं जाना चाहता,
मुकेश पिज्जा को 
साथ खाना चाहता,
मुकेश को समय 
रोकने का हक़ है,

मुकेश सड़क पर 
झूमना चाहता है,
वो गाड़ी से लड़कर 
गिरना चाहता है,
उसे नाली में भी 
लोटने का हक है,

मुकेश किशन बन 
बंशी बजाए,
मुकेश फ़िल्मों के 
गीत गुनगुनाये,
मुकेश को कलियां 
बहुत भा रही हैं,
उसे बागों की कलियाँ 
खोंटने का हक है!

उपहार

क्या दिया है इस बार 
क्या लाए हो उपहार,
जन्मदिन पर विशेष 
कैसे आए खाली हस्त,

कैसी है मुस्कान 
जो फीकी-सी है,
कैसी हो मेहमान 
निर्लिप्त से हो,

यह त्यौहार में शामिल
होने के बाद,
कैसा चाहते स्वाद 
जब आए नहीं व्यवहार
क्या है तुम्हारा उपहार?

केंद्र

वहाँ पर हूं खड़ा 
की जा सकूं मैं 
घर को अपने खोजकर,
खोया नहीं मैं 
मोड़ पर या 
रास्ते की चौक पर,

रास्तों की स्मृति 
समझ की लाठी,
पीपल की छांव 
मंदिर की शीतलता,
साथ हैं मेरे 
और रहेंगे मेरे 

राम नाम लेकर मैं 
चलते चला आऊंगा,
लंका के उपवन 
ब्रह्मास्त्र के बंधन,
लंकेश के दरबार 
और सिंधु लाँघ अपार,
पंचवटी के तीर्थ 
राम के पास!

Monday, 19 February 2024

चाशनी

एक परत भर लिपटी है 
चमकती थोड़ी पतली,
स्वाद और ललक से 
परिपूर्ण पारदर्शी,
रेशों की बुनी 
लकीर रेशमी,

आकर्षित करती जल-जल
कण-कण टपकती,
एक रस-मंजरी 
उड़लती, ढुलकती,
आज निखरती
रात की चाँदनी-चाशनी,

शिथिल ठंड मे
अलग कण-कण में,
यह सजावट रहित 
घनी और मुदित,
आज बुझी-सी पड़ी
रात की रोशनी-चाशनी!

Friday, 16 February 2024

थोड़ी दूर

थोड़ी दूर हैं सांसे 
थोड़ी दूर पर चेतना,
थोड़ा समय में मुक्ति 
थोड़े पास हैं राम,

थोड़ा बहुत प्रयास 
थोड़ा सा इन्तेज़ार,
थोड़ी सा ध्यान 
थोड़ा सा और काम!

राम ने कर दिया

राम ने कविता लिख दी
राम ने भूख मिटा दी,
राम ने मांगने से पहले 
मेरी राह बना दी,

राम ने चलाया सही राह पर 
राम ने घुमाया सही मोड़ पर,
राम ने मिलाया मुझे उससे 
राम ने हराया मेरे मोह पर,

राम ने उनके लिए 
आराम योग दी,
राम पर ही मैंने 
हर बात छोड़ दी!

Monday, 12 February 2024

घटना

किसको दिया समय 
किसकी बड़ी वजह,
किसका कितना एहसान 
किसका मुझपर अधिकार 
किसके कैसे शब्द 
किसका कैसा प्रारब्ध,
कौन शत्रु, कौन मित्र 
कौन लक्ष्मण कौन शत्रुघ्न,
किससे कितना मिलाप,
यह सारी घटना!

Surrender

तुम आओ मेरे पास 
त्याग कर सब भ्रम,
मोह के ज़ंजीर 
चाह के शमशीर,
इतिहास के सारे प्रश्न 
मेरे और तुम्हारे हस्र,
कयामत की बात 
दीवानेपन के ज़ज्बात,
तुम आओ मेरे पास 

आज खाली करके शब्द 
उसके होने के प्रारब्ध,
गुरु की भूलकर बोली 
छुट्टी लेकर होली,
छोड़कर मरहम 
खोलकर सब घाव 
करते नहीं कुछ मोल 
गिरा के अपने भाव 
तुम आओ मेरे पास!

Saturday, 10 February 2024

इतिहास

तुमसे मिलकर 
क्या कहूँगा,
किस चीज़ की 
याद होगी,
कौन-सी कविताएं 
तुम पढ़ोगी,
किस बात की 
मिन्नत मैं करूंगा,
कैसे तुम्हें मनाऊँगा,
कौन-सी दलील 
तुमको सुनाऊँगा,

तुम मिलोगी 
तो तुमको 
क्या कहकर 
बुलाऊँगा,
कौन-सी शरारत से 
दिल बहलाऊँगा,
कौन से इशारे 
मैं जानबूझकर 
अनदेखा कर दूंगा,
कौन-सी हरकतों से 
मैं बाज नहीं आऊंगा!

Friday, 9 February 2024

लक्ष्य

शूर्पणखा को राम चाहिए 
और लक्ष्मण भी,
भाई का सत्कार 
और प्यार भी,

सूर्पनखा की पीएचडी 
BJP होने ना दे पूरी,
सूर्पनखा की सहेली 
उसके प्यार से खेली,
शूर्पणखा को चाहिए 
काम भी और आराम भी!

दिन

आज उनका 
सब कुछ रहने दो,
आज उनकी 
बातें कहने दो,
आज मन के हैं 
भावुक से पल
आज उदासी बहने दो,

आज पुराने गीत सही 
आज को बिसरे प्रीत सही,
आज न बस मे हो ये मन 
आज विवेक को सहने दो,

आज हार की बात रहे 
आज भूल की याद रहे,
सुबह नींद मे सोने दो 
आज अतीत को रोने दो,

कल के आने इन्तेज़ार 
घूमने जाने का विचार,
ध्यान मे डूब के उस पार 
कल के जीवन को आने दो!

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...