Thursday, 28 July 2022

साक्षी जी

मै मना रहा हूं तिमिर पर्व,
तुम रच लेना आलोक छंद,
मन का चातक, करता क्रंदन,
सखी का बजता, ढोलक–मृदंग,
अब संग नही, उसका उमंग,
संगी बंधती पिय हृदय–संग,
मै तंग–तंग, बिन राग–रंग,
मेरा प्रसंग, अब निः प्रबंध,
आया प्रयाग, किसी और संग,
रंघुनंद–द्वंद , धूमिल आनंद,
सिय बिन अप्रिय, उल्लास कंद,
सुध है विलसित, स्तब्ध–गंध,
आलस अथाह, निस्तेज मंद,
वन अब गमन, इक नई जंग,
अगणित होते विप्लव–मलंग,
क्या है ये काल, क्या देश रंग?

अब और ठौर, अब और ढंग,
खग डाल नई, अब नीड़ नया
बीते असाड़, अब नव बसंत!

Friday, 22 July 2022

नरेंद्र मुर्मू

माता सबरी आज
अयोध्या मे
स्वयं आ गई,
नरेंद्र की पुकार पर
दिल्ली पहुंच गई,

अब राम–राज्य देखेंगी
और राम–राज्य बनायेंगी,
माता सबरी अब नरेंद्र संग
मां भारती की बेड़ियां छुड़ायेंगी!🌻

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...