Tuesday, 15 February 2022

मोतियाँ

बिखरे हुए मोतियों की
माला संभालता हूं
मै टूटते हुए समय की
धार को सवारता हूं,

मै उठा के धागा 
और उठा के मोतियाँ
हाथ से ही बार–बार
बार–बार डालता हूं,

संवर रहा समाज है
या गा रहीं हैं तितलियां
मै फूल की जड़ों मे खाद
उठा–उठा के डालता हूं।

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