Tuesday, 21 March 2023

flirt

तुम बहुत खूबसूरत 
तुम और चंचल,
तुमपर ढ़की 
गुलाबी जलन,

आँखें देखती नहीं 
मेरी आँखों को सीधी,
किसी और का वसन
कहीं और ही है मन,

ये अलग चुभन 
ये सतत अगन,
ये तेरी-मेरी लगन
गलत-सही का दर्पण,

टूटता है तन 
टूटता कई बार,
आज फिर चला
औरो के अपने द्वार,

अब खिड़कियों 
की रोशनी ही
कर रही गुलजार,
छोड़ आए 
हम बगीचे,
फूल और बहार,

हम छोड़ आए चाँद 
छत पर बादलो के हाथ,
हम छोड़ आए हैं 
तुम्हारा साथ, तुम्हारा हाथ!



No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...