Thursday, 17 August 2023

मैडम

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?

चखना है प्लेट मे
व्हिस्की गिलास मे?
भाई बैठा बगल मे
दोस्त आसपास हैं!

अंधेरा भी है फैला 
गाना बज रहा तेज,
सभी की बुद्धि 
हुयी है आउट ऑफ फेज,
नाचने का माहौल है 
दिन भी तो खास है!

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?

चिमनी जैसा धुआं निकाले 
और मिसाइल बातें,
उल्टा-पुल्टा होकर लुढ़के
जागे सारी रातें,
ये माया की नगरी मे
बची कौन-सी प्यास है?

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?



No comments:

Post a Comment

फैसला

फैसला हक में हमारे कर दो आज इंसान बनकर, कब तक रहोगे मौन मन मे महज चित्कार कर, जो है सभी स्वीकार उसको स्याह कर दो, आज लोगों की  जुबाँ की राह ...