Monday, 16 September 2024

घर

घर से निकलने का 
बड़ा लगा है,
बना लिया है मैंने 
अपना यहां पर घर,
यहां के लोग 
यहां के मंजर
लगने लगे कितने सुंदर,

यहां बसा है मेरा दोस्त 
यहां रुका मेरा परिवार,
यहीं पर हैं भगवान मेरे 
यहीं मिला मुझको वरदान,

यहां नजदीक बड़ा बाजार 
यहां गाड़ी और घोड़े-सवार,
यहीं कॉलोनी में साथ हैं सब 
यहीं मंदिर में भजन व्यावहार,
यहीं पर ओम, यहीं पर हवन 
यहीं पर रात, यहीं पर शयन,

यहां की भाषा, यहां पर गीत 
यहां पर रंजन, यहां पर रीत,
यहां पर खाना यहां पर रोटी 
यहां पर चैन, यहां पर ज्योति,

कहां बनेगा ऐसा घर 
कहां मिलेंगे ऐसे लोग,
कौन बनाएगा फिर मिलकर 
घर से परे और एक घर?


No comments:

Post a Comment

फैसला

फैसला हक में हमारे कर दो आज इंसान बनकर, कब तक रहोगे मौन मन मे महज चित्कार कर, जो है सभी स्वीकार उसको स्याह कर दो, आज लोगों की  जुबाँ की राह ...