Thursday, 26 September 2024

वचन

अगला शब्द
अगली फिल्म 
अगली चाय
अगले लोग
अगली किताब
अगली ट्रेन 
अगली बोगी
अगला ध्यान
अगला ज्ञान 
अगला मिलन
अगली बिहार
अगला समाज,
अगली कहानी
अगले कृष्ण 
अगले राम
अगला जन्म
अगला काम!

No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...