Friday, 9 May 2025

बल

बल है क्या जिसमें 
भय का सृजन हो, 
ना कांपते अधर 
न ग्लानि का असर,

मुस्कान हो और प्रार्थना
स्थिर खड़ी हो याचना,
शब्द शील बंध हों
धैर्य की हो धारणा,

यह बल हो प्रतिबिंब 
जिसमे देखे स्वयं को वीर,
इसमे बहुत चंचल 
हनुमान कब गंभीर?

राम का हो नाम
राम की हो आश,
राम के अश्रु
राम का ही बल!

No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...