कुछ एक कदम तक बस,
प्यादा रहा छोटा, प्यादा रहा अदृश्य
प्यादा रानी की ओट से
करता नृत्य सदृश्य,
रानी की ओर देखते सब
भर्त्सना से भरकर,
और रानी है खिन्न
सब काम भी करकर,
रानी के सब विचार
और प्यादे के सब अंगार
रानी की सहज चेष्टा
प्यादे की धूर्त उपेक्षा,
प्यादा का हाहाकार
रानी का तिरस्कार!
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