करना था बहुत अद्भुत,
हमे करने लगे हैं लोग
क्यों धर्म से पदच्युत,
आडंबरो का ज्यो हुआ
पथ पग पर पारावार,
सब हिल गया और डूबकर
मन विचलित, हृद त्राहीमाम,
घर तक लगी लौ
और कुछ छींटे अंगार की,
भेद देती गाहे बगाहे
जप-तप के दिवार की
दो निश्चयों का रास
दो निश्चयों का रंग,
आ गया यह दौर मेरा
आते ही हुआ हुड़दंग!
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