Monday, 9 January 2023

जाम

तुम लब पे लगाके
पीते हो घूंट–घूंट,
मै सांस मे हरदम
पाता हूं घट–घट,

तुम जीवन भुला के
बना लेते हो,
अपने खातिर जाम,
मै जीवन मे घोल के
पाता हूं,
अपने भीतर राम!

Sunday, 8 January 2023

अंतर

किसको बोल देता हूं
किसको छोड़ देता हूं,
मै किसको पास रखकर
अपनी गिरहें खोल देता हूं,

किसको चुप कराता हूं
किसकी सुन भी लेता हूं,
मै किसके लिए बढ़कर
किसको छोड़ देता हूं,

किसकी बात लगती है
किसे बच्चा समझता हूं,
मै किस–किस हूं मुस्काता
किसपर दम दिखाता हूं,

मन के खेल हैं सारे
मन को जो लगे प्यारे,
किसी को राम कर देता
किसे रावण बनाता है!

तुमसे

तुमसे प्रेम
तुम्ही से जलन है,
जाने पर तुम्हारे
लगी जो अगन है,
है बहुत बात करता
मुझसे ये मन है,
है उठता–गिरता
ये झलता बहुत है,

ये बहुत से बरस की
बड़ी–सी लगन है,
ये प्रेम और पिपासा की
पागल मिलन है,
ये ठुमरी की धुन है
ये शहरी चमन है,
तुमसे मुहब्बत
तुम्ही से जलन है!

Friday, 6 January 2023

loss

उसकी चाह क्यूं
जो चाहिए नहीं?
जिसमे मै नहीं
मेरा सरोकार नहीं
न मेरी रज़ा
न मुझको कोई
इंतजार,
न मुझको एतबार
क्यूं छूटता लग रहा है
मुझे ऐसा प्यार,
जिसका था भी नहीं इकरार?

नानी

पत्थर का छोटा टीला
और पत्तों की छानी धूप,
अढ़ाईया की जली आग
बदली मे छुपी धूप,

नानी के घर का आंगन
ठहाकों की उठी गूंज,
चाय का बड़ा बर्तन
टोस की लगी भूख,

ठंडा–ठंडा पानी
गुसलखाने की कतार,
सम्मो माई का पेड़
टीने का बना गेट,

रात का सेनुआर
नीम का पेड़,
भोजपुरी वाला बुधिया
‘नदिया के पार’

मैदान की घास
चश्मे से छीली सब्जी,
नाना से थोड़ी दूरी
बोली की बड़ी सख्ती,

बड़ी छोटी सी थी
मेरी नानी की दुनिया,
मेरे मन मे बड़ी हुई
मेरी नानी की तश्वीर!


Thursday, 5 January 2023

engagement

किसी बात से
जुड़ गई,
जुड़ गई
किसी के
जज्बात से,

आज 
जुड़ गई तुम
किसिके
हर दिन से
हर रात से!

हरे हरे!

धरे कामा
धरे कामा
कामा कामा 
धरे धरे,
धरे तृष्णा
धरे तृष्णा,
तृष्णा तृष्णा 
धरे धरे,
हरे रामा
हरे रामा,
रामा रामा
हरे हरे,
हरे कृष्णा
हरे कृष्णा,
कृष्णा कृष्णा 
हरे हरे!

मिट्टी का घर

यह मेरा मिट्टी का घर
चलता है मिट्टी के ऊपर
मिट्टी गिरती इधर–उधर
मिट्टी के घर, रहता वो पर,

मिट्टी की धर डगर चला चल
आकर बैठा भी मिट्टी पर,
मिट्टी पर एक और परत धर
मिट्टी से डरता धरता पग,

मिट्टी मे जब ही मेरा घर
तो क्यों मिट्टी को धरता भर कर,
मिट्टी पड़ी है मन के ऊपर
मिट्टी मे धूसरित होता मर! 

Monday, 2 January 2023

उधार

मैं उधार देती थी उसे
अपनी जेबें काटकर,
वो ठग लेता था मुझे
मेरी मिट्टी को नापकर,
करती थी इंतजार
प्लेटफार्म पर बैठकर
उसके आने की राह
अकेले ठंड झेलकर,

सहेलियों से मेरी मुझको
कम जताता था,
वो मेरे शरीर को ही
मुझपर बोझ बताता था,
बड़ा बोझ बनकर आया
मेरा उधार वाला प्यार!


Sunday, 1 January 2023

नया

इस साल मे नया क्या है
पुराने से अलग क्या है,
क्या इस साल मिल पाएंगे?
क्या कहीं नौकरी लगेगी?
मेरे घर की दीवारें
क्या छोटी हो जाएंगी?
या पहरेदारों की कतारें
कोई दूर हट जाएंगी?

क्या हवा शुद्ध होगी दिल्ली की
या वरुणा मे कचरा नहीं गिरेगा,
क्या संगम पर संगम होगा अपना
या गंगा मे नीचे तक दिखेगा?

कौन परीक्षा अब
कोई लीक नहीं होगी?
कौन सी joining अब
जाकर ठीक लगी होगी?
क्या होगा नया
जो अब तक नहीं हुआ?

तुम्हारी बात नई होगी
ये अंदाज नया होगा,
कोई अदा नई होगी
ये अल्फाज नया होगा,
अब चाल नई होगी
मुलाकात नई होगी,
संदर्भ नया होगा
पहचान नई होगी,
पहले तो सपनो मे
जो बात हुई होगी,
इस वर्ष के आने पर
वो बात सही होगी,
अब तुम भी नई होगी
अब मैं भी नया हूंगा!😇

रुखसत

मेरी निगाह मे तुमने
अपना नाम कर लिया,
कुछ बोलने से पहले
मुझसे राम की दिया,

मुझे मेरी ही नजर में
बदनाम कर दिया,
मेरे चिल्लाने से पहले
मुझसे राम कह दिया,

विदाई के आंसू संग
क्यों सलाम कह दिया,
तुमने कंधे पे सर टिकाकर 
मुझसे राम कह दिया,

मेरी प्रेम–अगन को
तुमने काम कह दिया,
मुझे जानती नहीं हो
सरेआम कह दिया,
किसको पकड़ के रोता
तुम्हारी गोद जो नहीं है,
तुमने जाते ही जाते
मुझको ‘सियाराम’ कह दिया!

कुछ किए बिना ही मुझको
बदनाम कर दिया,
मेरा रास्तों पे चलना
कुछ हराम कर दिया,
लोगों से दूर करने मे
कुछ ऐसा जतन किया,
तुमने अयोध्या का मुझको
श्री राम कर दिया,
शिकवा गिला कहूं क्या
तुम्हे आखिरी मिलन पर,
मेहंदी से हाथ पर तुमने
सिया राम लिख दिया!



ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...