Monday, 20 March 2023

एक बहाना

एक बहाना 
और चाहिए,
नहीं आज 
उठने के लिए,

कुछ एक कदम 
रुकने के लिए,
फैली हुयी सियाही 
कलम मेरी 
रखने के लिए,

एक बहाना और 
कुछ और नहीं 
चलने के लिए,

टूटा एक ही पंख 
अब और नहीं 
उड़ने के लिए,

एक धमकी बहुत 
कुछ और नहीं 
कहने के लिए,

एक टिप्पणी 
से खिन्न,
अब और मौन 
रहने के लिए,

कुछ दर्द पर 
मरहम मल,
अब और सहन 
करने के लिए,

एक बहाना और 
दूर बहुत रहने के लिए!





Thursday, 16 March 2023

गलबहियाँ

तुम्हारे साथ घुमना 
रखके हाथ कंधों पर,
भरोसा और प्यार 
एक साथ अंधा बन,

मेरी मुस्कान 
और तुम्हारी,
मेरी बात 
और तुम्हारी,
मेरी चाल 
संग तुम्हारी,
मेरी जिंदगी 
और तुम्हारी,

चल रही गलबहियाँ!

इसके बाद

वो भी होगा 
इक दिन,

वहाँ भी 
जाना है,
उस डाल 
बैठना है,
उस झील 
नहाना है,
कुछ और 
भी उड़ना है,
कहीं और 
तैरना है,

उस मंदिर 
पूजा है,
इस मस्जिद 
किया नमाज,
दरगाह भी 
झुकना है,
कीर्तन भी 
गाना है,

जो आज 
कर रहे हैं,
अब उसको 
पूरा कर,
अगले समय 
अगले दिन,
वो भी होगा 
कल के दिन,
जी लेता हूं 
आज के दिन!

bomb

कपड़े बदल लिए 
पगड़ी उतार दी,
कल पुर्जे जुटा लिए 
और रॉकेट बना लिया,

पटाखे जला लिए 
बारूद भर दिया,
मिलकर धुआं उड़ाया 
नेस्तनाबूद कर दिया,

आज आगे बढ़कर 
हमने भी बना लिया 
लड़ने वाला बम
कुछ करने वाला बम!

Sunday, 12 March 2023

हिस्सा

किसका कितना हिस्सा है 
किसका कितना बनता है?
किसको मिट्टी मिलती है 
किसके हिस्से सोना है?

कौन धर्म के काबिल है 
कौन बेकार निठल्ला है?
कौन माया मे गाफिल है 
कौन अनजान सा लल्ला है?

किससे बचकर रहना है 
किसको किससे बचना है?
किसके मन मे पाप बड़ा 
किसने है संताप धरा?
किसको कितना हिस्सा है 
किसके कर्म लिखा क्या है?

तड़प

जब तड़प नहीं 
तो नहीं हैं राम?
क्या हर जगह 
नहीं हैं राम?
प्यास मिटाते 
मिलते हैं,
पर पनघट पर 
नहीं हैं राम?

मन की गहराई 
के भीतर 
घुसते ही क्यूँ 
नहीं हैं राम?
सतह भर पर 
अठखेलियाँ करते 
मिलते-जुलते 
यहीं हैं राम?

राम नाम के 
जाप को धूमिल 
करते भी 
क्यूँ नहीं हैं राम?
राम धाम 
पहुंचाने वाला 
राम सरीखा 
राम का नाम!
राम राम राम राम 
सत्य सत्य राम राम!

Saturday, 11 March 2023

साधना

सुनकर उनकी बात 
मौन दिया मुस्कान,
कुशल क्षेम पूछा
फिर हृदय खोल संबाद,
हाथ जोड़कर नम्र 
करते पहले कर्म,
देखा खुद को 
देखा सबको,
ले ले राम का नाम,
साधना बड़ा संग्राम!

नोक-झोंक

कुछ शब्द 
बहुत ही 
पहले के,
बिन सोचे-समझे 
बोल दिया,
कुछ यादें उनकी 
ताजा की,
कुछ सीमाओं को 
तोड़ दिया,

जब बोला बिना 
कुछ रुके हुए,
बस बात के आगे 
बात रखी,
कुछ तोहमत 
उनपर लगा दिया,
कुछ बातें भी 
उनकी नहीं सुनी,

आज काल 
बेरोक-टोक,
हो जाती है 
नोक-झोंक!

छुट्टी

राम ने छुट्टी 
कब ली थी?
कब काम नहीं 
करने खातिर 
वो घर पर 
थोड़ा बैठे थे, 
कुछ गप्पे 
मारने की खातिर 
वो आराम 
लगाकर बैठे थे,

कब वो बहुत 
अयोध्या की 
चिंता करने 
बैठ गए,
कब राजा 
वो बने तो,
जनता कि सुध
लेना भूल गए,
कब वो 
अपने सपनों मे 
कल्याण जगत का 
भूल गए,
नरेंद्र ने छुट्टी 
कब ली थी?

Friday, 10 March 2023

राम कहाँ हैं?

राम कहाँ हैं 
कहाँ तक हैं 
कहाँ नहीं हैं?

जहां छोड़कर
आए थे 
वही पर बैठे हैं,
या वहाँ पहुँच गए 
जहाँ के लिए 
निकले थे

वहाँ गंगा 
पार कर रहे हैं,
या फिर
झोपड़ी बना रहे,
चले गए गौना मे
या पीहर मे बैठे हैं,
उठा रहे गारा-मिट्टी या 
दुकान खोलकर बैठे हैं,

राम आज हृदय के 
कोलाहल मे,
किस स्वर्ण-मृग 
को दौड़ाते,
आज ध्यान के 
क्षणिक व्याधि मे
राम कहाँ पर 
रम जाते,

राम हृदय वन छोड़
आयोद्ध्या के राजा 
तो नहीं बने,
राम सबर कर रही 
तमाम माता को 
भूल तो नहीं गए,

राम अहिल्या माता के 
तर्पण करने कब पहुंचेंगे, 
राम हनुमान को दर्शन देने
किषकिन्धा कब आयेंगे?

राम के जस-परताप कहाँ हैं?




Thursday, 2 March 2023

बात ही खत्म

करते-करते हो गई 
सब बात ही ख़तम,
पढ़ते-पढ़ते हो गए 
ज़ज्बात ही ख़तम,
क्या जाने उसके बारे मे,
क्या ही उसको बूझे 
क्या हम खाना-पानी पूछें 
क्या पाए साथ निभाने मे?

अब बिना बात के 
मिलने के,
दिन रात भी ख़तम,
अब लगा ठहाके 
हँसने के,
हालात भी ख़तम,
अब उत्कल के 
दरिया मे
उठना बैठना नहाना है 
गंगा-माई जाने का 
इत्मिनान भी ख़तम?




ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...