विचार है
आचार है,
संकल्प है
निर्विकल्प है,
तेज है
प्रकाश है,
पवन है
उल्लास है,
अस्त्र है
ये शस्त्र है,
शास्त्र है
ब्रह्मास्त्र है,
मुस्कान है
अट्टहास है,
मिट्टी से
आत्मा तक
खादी विकास है!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...