Thursday, 31 August 2023

वही

वही जिसे न रक्षा की जरूरत है 
जिसे बंधन ही पसंद नहीं,
वही जो सूरज की किरणों जैसी 
निर्वात और सघन मे है,
जो मेघ से चल, बूँदों-सी बरसी 
शहर और निर्जन मे है,
चेतना समान जो हुई 
जड़- चेतन के स्पन्दन मे है,
जो छोड़ अयोध्या आ निकली 
विचरण करती कानन मे है,
जो शिव तत्व-सा फैल गई 
वसुधा के कण-कण मे है,

जो मुक्ति की अभिलाषा को 
तृप्ति दिए बंधन मे है, 
जो युक्ति की परिभाषा लिए
विचारों के मंथन मे है,
जो परावर्तित होती रोशन होती 
हर आँखों के दर्पण मे है,
जो जीत से आगे पहुँच गई
निःस्वार्थ समर्पण मे है,
जो आंसू बनकर ढुलक रही
अबोध के क्षण क्रंदन मे है!
 

Wednesday, 30 August 2023

कमीज़ की तमीज

कहाँ से है अंदर 
और बाहर कहाँ तक है,
मेरी कमीज़ से तमीज 
उजागर कहाँ तक है?

ये बेल्ट के ऊपर 
उभरी हुयी क्यूँ है 
ये आस्तीन भी आधी 
उतरी हुयी क्यूँ है?

ये टोकने की जिद है 
मुझे ढूंढती आयी,
आज गिरहबान खुली 
उठती हुयी क्यूँ है?

सब धार ले पोशाक 
संत मैकाले वाली,
'बापू' की तस्वीरे आज 
खुरची हुयी क्यूँ है?

ये कमीज़ मे तमीज 
लिपट गई क्यूँ है?
कुर्ता बनी मूर्खता की 
प्रतीक हुई क्यूँ है? 

सब राम बनने के लिए 
कुछ साफ़ हो गए हैं,
कुर्ता-पायजामा छोड़कर 
मेहमान हो गए हैं,

कुछ निकल रहा पीछे 
मेरी पुंछ है शायद,
लंका जलाने के लिए 
है छूट गई शायद! 🙏

Monday, 28 August 2023

आसना

ना तुम ही मानी 
ना मन मेरा ठहरा,
ना तुमने बात को रोका 
ना मैंने तुमको टोका,
ना तुम ठीक समय पर आयी 
ना मैंने हाथ को पकड़ा,
ना तुम चुप हो पायी 
ना मैंने किया कोई झगड़ा,
तुम चली गई, मैं चला गया 
तुम रुकी नहीं, मैं चला गया!

Friday, 25 August 2023

खुशामद

खुशामद इतनी क्या करें 
की नाक में दम पड़ जाए,
सर इतना भी क्या झुकाएं 
की ऊँचाई कम पड़ जाए,

ना चुप इतना भी रहें 
की आंखें भी नम पड़ जाए,
निरीह ना हो इतना की 
पशुओं को रहम पड़ जाए,

सितमगर के इम्तेहान को 
मुस्कुराकर भी निभाया जाए,
कहीं उनको अपनी खुदाई का 
ना भरम पड़ जाए,

उनको सुनने की तमन्ना तो 
नागवार हो रही है,
फोन इतना भी क्या करें 
वो सहम पड़ जाए,

अब नहीं समझौते की 
गुंजाईश लग रही है,
क्यूँ न महीने दो महीने की 
अनबन पड़ जाए,

आओ नाम लिख लें 
दुश्मनों का दिलों पर,
ना जाने किस मोड़ पर 
वो सनम बन जायें,

हसरतें कहाँ
पूरी होती हैं किसी की,
तुमसे मिलने को कम 
एक जन्म पड़ जाये,

और नसीबो से होते हैं
फरिश्तों से मुलाकात,
ना जाने किस पल 
अल्लाह का करम पड़ जाए!


Tuesday, 22 August 2023

मेरे राम-तुम्हारे राम

मेरे राम, अच्छे राम 
तुम्हारे राम, सभी के राम,
खासम खास हैं मेरे राम 
आम के आम तुम्हारे राम,

मेरे राम से सबको काम 
राम तुम्हारे अयोध्या धाम,
मेरे राम भटक रहे हैं 
तुम्हारे राजा सबके राम,

अग्नि परीक्षा वाले राम
धनुष तोड़ने वाले राम,
त्याग-तपस्या वाले राम 
बाली मारने वाले राम,
अंधे राम, काणे राम
हर जाति के अपने राम,

घर के राम, बगल के राम 
सोते राम, जागे राम,
आते राम, जाते राम 
खाते राम, नहाते राम,
खड़े राम, बैठे राम 
ध्यान-मग्न और लेटे राम!

प्रेम के राम, रंज के राम 
झूठ के राम, सत्य के राम,
आज के राम, कल के राम 
नाथूराम और 'हे राम'
सिया के राम, जय श्री राम,
दिनकर और  शरण के राम,
मुन्शी प्रेम चंद के राम,
हरिशंकर और अशोक के राम,
मिथिला और मथुरा के राम 
वृंदावन, मंथरा के राम,
कौशल्या-दशरथ के राम
कैकयी और भरत के राम,
सुमित्रा, उर्मिला- लक्ष्मण के राम,
मीरा और तुलसी के राम 
सुर और कबीर के राम,
जितनी वाणी उतने राम!

बंगाल और द्रविड़ के राम 
झारखंड, छत्तीसगढ़ के राम,
लद्दाख- धारवाड़ के राम 
कर्नाटक और तमिल के रमन,
बनारस और उज्जैन के राम,
गाँव के राम, शहर के राम 
देहात और लंदन के राम,
चीन के राम, मंगोल के राम 
यूपी और बिहार के राम,
पर्वत और विरान के राम,
हाथ के राम पैर के राम 
कंकर और ब्रह्मांड के राम,
जितनी जगह उसी मे राम!

Sunday, 20 August 2023

करार

ये जो दिल का करार है 
क्यूँ रह गया तुम्हारे पास है,
ना तुक है, ना सवाल है 
ना तरीके मिलते हैं 
ना इज़हार है,

सोचते भी हैं तो 
उसमे भी तकरार है,
जीवन मे कोई 
तलब तो नहीं,
तुमसे मिलने की कोई 
वजह तो नहीं,
फिर आरजू मे क्यूँ 
एक आवाज़ भर दरकार है?

क्यूँ खुशी है तुम्हारे 
चर्चों की गूँज से,
क्यूँ गलतियाँ तुम्हारी 
दिखती ना पास से,
छुप जाती हर कमी 
मुस्कान के नूर से,
तुमसे दूर जाने की 
मुझे कैसी तलाश है?


Saturday, 19 August 2023

तुम्हें छोड़कर

तुम्हें छोड़कर कहाँ आऊँ 
तुम साथ चलती हो,
तुम्हें भूलकर कहाँ जाऊँ 
तुम सोच बनती हो,

तुमसे बहाने क्या करूँ 
तुम सब जानती हो,
तुमको हिदायत क्या लिखूँ 
तुम नब्ज पकड़ती हो,

तुमसे उम्मीदें क्या करूँ 
तुम फ़रियाद आखिरी हो,
तुमसे पैरवी क्या करूँ 
मेरे काम करती हो,

तुमको समय क्या दूँ 
तुम ही तो घड़ी हो,
तुमको तुम भी क्या कहूँ 
तुम मुझमे बसी हो!

चाहत

जो है बेधड़क 
जो है बेपरवाह,
जिसकी है बिना सर 
बिना पैर की बात,

जिसको क्लास मे
लुडो खेलना है पसंद,
जिसको ढूँढ़ना रहता 
हर बात पर आनंद,

जिसको दिन मे आती नींद 
रात भर हो जागना,
जिसको हर एक बहस 
लड़कर जीतना,
योग भी है जिसके 
लिए एक बकवास 
जिसको बोतल से पीने वाले 
लगते हैं खास,

जिसको बीमारी मे 
तलब की ज्यादा चिंता है,
दवा मंगाने मे जिसको 
बहुत ही खर्चा है,
गिफ्ट मांगने मे 
जिसको नहीं कोई हिचक,
हर बात में है 
छुपा कोई सबक,

जिसकी हर अदा 
मुझसे बड़ी जुदा,
दिल क्यूँ उसे 
इस बार ढूंढता,
क्यूँ किसी ऐसे को चाहता!

Friday, 18 August 2023

uncomfortable

उनपर मेरा कविता लिखना 
उनको नहीं पसंद,
उनपर मेरा कुछ भी कहना 
उनको नहीं पसंद,

उनकी कोई चर्चा करना 
उनको नहीं पसंद,
उनको मेरा देख मुस्काना 
उनको नहीं पसंद,

नहीं पसंद उनको की कोई 
बातें हों मदहोशी की,
नहीं पसंद उनको की कोई 
करे इशारे कोई भी,

उनको भाता नहीं की 
उनकी तारीफें भी खुलकर हों,
वो संवर के राहों पर निकलें 
पर किसी की नजर उन्हीं पर हो,

उनकों नहीं पसंद की 
महफ़िल लूट ले कोई बातों से,
उनको नहीं पसंद की दोस्त भी 
चुटकी लें जज़्बातों पे!

Thursday, 17 August 2023

मैडम

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?

चखना है प्लेट मे
व्हिस्की गिलास मे?
भाई बैठा बगल मे
दोस्त आसपास हैं!

अंधेरा भी है फैला 
गाना बज रहा तेज,
सभी की बुद्धि 
हुयी है आउट ऑफ फेज,
नाचने का माहौल है 
दिन भी तो खास है!

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?

चिमनी जैसा धुआं निकाले 
और मिसाइल बातें,
उल्टा-पुल्टा होकर लुढ़के
जागे सारी रातें,
ये माया की नगरी मे
बची कौन-सी प्यास है?

मैडम मेरी क्यूँ उदास हैं?



ज़माना

तुम बात करोगे मेरी तो 
इस बार ज़माना क्या कहेगा?
मेरी बातों को 
मानोगे एक बार में 
तो ज़माना क्या मानेगा?
अगर देखोगे मुझे एकटक
तो ज़माना क्या देखेगा?

ज़माने के साथ नहीं बदलोगे 
तो ज़माना क्या कहेगा?

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...