Wednesday, 10 November 2021

लकीर

मिटाती हो, बनाती हो
मेरी तकदीर हाथ पर,
तुम प्यार करती हो मुझे
देती नही हो साथ पर,

हटाती हो फोन मे से
मेरा नंबर, हटाने के लिए,
दिलों में याद रखती हो मगर
तकिया बनाने के लिए,

मेरा भी जिक्र करती हो
बताने के लिए, जताने के लिए,
मेरी भी फिक्र करती हो
मुझे आगे बढ़ने के लिए,

मुझे पानी की लकिरों
की तरह,
बनाकर भूल न जाती,
पत्थर पर खचाकर
खुद की धारें
नोक करती हो,

मुझे भुलाकर चैन से
तुम सो नहीं पाती,
मुझे तुम याद आती हो
मुझे जब याद करती हो !

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