Friday, 22 July 2022

बरसात

वर्षा नहीं आई
बरसात आ गई,

बूंदे बूंदे टपकी
मेरी सरपरस्ती को,
मुझे फिर दिलासा देने
सौगात आ गई,

ये हो आई JNU
ये ठहरी थी कुछ देर Goa,
ये बंगाल खाड़ी से लेके
कुछ फुवार आ गई,

आज फिर से बिन बुलाए
तेरी याद आ गई,
दिल्ली से चल के निकली
बरेली मे लहर खाई,
लखनऊ के रंग ओढ़े
इलाहाबाद आ गई,

मेरी गली से निकली
मिट्टी मेरी उठाई,
बनारस मे जाके पहुंची
गंगा की गोद बैठी,
ये करके दुआ मुबारक
इत्मीनान आ गई,

वर्षा नहीं आई, 
बरसात आ गई!🌻

No comments:

Post a Comment

अधिकार

तुम पर है अधिकार  तुम्हारे होने का चलने का,  तुम्हारे बातें मुझसे करने का  और फिर तुमसे मिलने का,  यह बोलो और फिर शांत रहो मैं सोचूँ और तुम ...