Tuesday, 31 January 2023

ठंडी हवा

ये ठंड भी न रहेगी
ये हवा भी न बहेगी,
ये डर भी काफुर होगा
ये उदासी भी जायेगी,

भूख भी मिटेगी
और शब्द भी सजेंगे,
कोई साथ भी चलेगा
कारवां भी बनेगा,

हम तब भी मिले थे
और फिर से मिलेंगे,
हमारी राहें अलग हैं
हम साथ तो चलेंगे,

ये नींद नहीं होगी
कोई वीर्य न बहेगा,
रातें भी सुकून होंगी
ये कंबल भी हटेगा,

ये स्वेटरों के पर्दे
कभी बीच से हटेंगे,
हम ठंडे पानी नहाने
कभी भोर मे उठेंगे,

वो राह फिर सजेगी
वो खिलखिलाएंगे फिर
टकरार फिर से होगी
चुप और कुछ रहेंगे,

आया है नया मौसम
बस आज डर रहे हैं,
मुस्कान फिर से होगी
मुलाकात फिर से होगी,

हम गले लगा के उनको
एक बार फिर चलेंगे!

Wednesday, 25 January 2023

रिवीजन

कुछ पाठ पुराने
खोल दिए जब,
हाथ जोड़ कर
बोल दिए जब,
तब आज की 
खुशकिस्मत पर बैठे,
क्या सोचते 
कैसे थे तब?

पर यह अच्छा 
बहुत रिवीजन,
जाना कैसा
आए यहां तक,
अब इसका 
महत्व जानोगे,
तुम इसको
बचा पालोगे!

अब गलत
जब कदम बढ़ेगा,
मुस्कान मे जब
कंधा उचकेगा,
तब मुस्कान
बचाने खातिर,
अपनी जंजीर
छुड़ाने खातिर,
कदम रुका
बचेगा जीवन,
नतमस्तक हो
करो रिवीजन!😇


उसको

उसको बतलाकर क्या होगा
यह सब दिखलाकर क्या होगा,
होना होगा सो तो होगा
उसके सामने कैसा रोना,

उससे बातें उसी शर्त पर
उसकी तारीफ बहुत किया पर,
घर पर बैठा बदलता चैनल
अब पछता कर कैसा खोना,

उसको उलझा कर क्या होगा
खुद को फुसला कर क्या होगा,
हाथ नहीं आनी है रोना
कैसा हाथ जोड़कर पाना?

कृतघ्न

दोष तुम्हारा
दोष न मेरा,
होश तुम्हें हो
होश न मेरा,
जीवन जीता
ये था प्रतिपल,
पर कुछ पल से
रोष तुम्हारा,
मन री छलिया
क्या कृतघ्न है,
शब्दों के
बुनता है घेरा,
दोष है मेरा
कैसा तेरा,
यह मन कैसा
करता क्रंदन,
जान बचाने 
वाला दुश्मन,
अपने शब्दों
की है तपन,
अपने हाथों
करता मैला,
जाकर बैठा
छत्ते ऊपर
पर अब कैसा
है असमंजस
क्यों होता 
इतना भी 
तूं कृतघ्न,
जिसने पल भर 
भी था संभाला,
उसी को देता
अब उलाहना,
मन क्यों गाता
फिल्मी गाना!


Monday, 23 January 2023

राग

राग दीपक
उन्माद और उभार
कश्मकश और टकरार
यत्न और रुकावट
यातना और यलगार,
ऊर्जा उत्सर्जन को
बेकरार,
हाथों पैरों का मरोड़,
यदा–कदा, कड़ा ढीला,
चरमराहट
उद्गार पर उद्गार

फिर राग मेघ,
तरल तत्व विस्तार,
ग्लानि का भरमार
ठंड और गर्मी
का साक्षात्कार,
दर्द और चित्कार
जख्मों का नव आकार,
हाथ जोड़ विनती
भविष्य का डर
भूत का विकार,

राग राम का आसार
सीता राम का आह्वान,
बजरंग की पुकार
सिया राम, सिया राम,
बनारस की याद,
गलियों की आग,
छोटा सा अनुराग
मेरा वही राग!🙏

Tuesday, 17 January 2023

चीनी

मै गुड़ खाकर 
चीनी क्या खाऊं,
मै मिठास मे
क्या–क्या मिलाऊं,
मै नमक ज़रा सी
जुबां पर रख लूं,
मै मिर्च ज़रा सी
चख लूं,
मै मन को
क्या–क्या दे दूं,
मै कैसे इसे फुसलाऊं,

मै गन्ने की बेटी को देख
अब किस्से ब्याह रचाऊं
मै राम नाम की मिश्री
अपनी जुबान से कैसे हटाऊँ
मै गुड़ खा चुका हूं
अब चीनी कैसा खाऊं?

मुस्कान

मैं देखता हूं उसको
जो होने वाला है,
मै मुस्कुरा कर फिर
चुप हो जाता हूं,

मै हल्की मुस्कान से
सांत्वना दिलाता हूं,
माया के भ्रम को 
सरल बनाता हूं,
दर्द की सीमा मे
सेंध लगाता हूं,

अपने इतिहास को
सामने पाता हूं,
अपने भविष्य को
छूकर सजाता हूं,
ज्ञान,अज्ञान और
परम ज्ञान के
अंतर को मैं
समझ पाता हूं,
मै किसी को 
जताता नहीं,
तीनों पर मुस्कुराता हूं,
मै ही मै को 
बढ़ाता–घटाता हूं,
मैं पर भी मैं मुस्कुराता हूं,

मै चक्र की धुरी पर
खड़ा हो जाता हूं,
मै अपने कब्र को
समेटता उठाता हूं,
मै तुम्हारी मांग को
को फिर से सजाता हूं
मै खीझ जाता हूं
मै कुनमुनाता हूं,
मै फिर मुस्कुराता हूं
अपनी मुस्कान फैलाता हूं!

सीढ़ी

सीढ़ी एक कदम की
तरक्की एक कदम की,
आगे बढ़ने पीछे हटने
हरकत एक कदम की,

मंजिल तक जुड़ती–चलती
पीछे आगे विस्तृत रहती,
यह साथी मेरे दम की
सीढ़ी एक कदम की,

ध्यान मे रहती
तो बन जाती
हमसफर कई सफर की,
मंजिल का दुख
अगर सताए
तो यह बड़े जतन की,
सीढ़ी मेरे कदम की!

flirt

निर्भीक किनारे तक जाता
मै झांकके तल तक घबराता,
मै हवा मे ऊपर उठ जाता
मै बिना रुके नीचे आता,

मै गोल–गोल चक्कर खाता
मै हाथों पकड़े जाली रहता,
चरखी के संग ऊपर उड़ता
ऊंचा–ऊंचा नीचे आता,

घबराता, मौत के पास आकर
मै डरता और डर जाता,
मै जीते–जीते कभी–कभी
मौत से हाथ मिलाता!🙏

Friday, 13 January 2023

दिनचर्या

मैं राम ओढ़ता हूं
मै राम बिछाता हूं
मै राम पकाता हूं
मै राम ही खाता हूं

मै राम पे बैठा हूं
मैं राम पे लेटा हूं
मै राम पे पढ़ता हूं
मै राम पे लिखता हूं

मै राम ही पीता हूं
मैं राम चबाता हूं
मै राम का सेवक हूं
मै राम का राजा हूं,

मै राम याद रखता
मैं राम भुलाता हूं,
मै राम की चौखट पर
श्री राम सुनाता हूं,

इस राम की नगरी मे
मै राम बुलाता हूं,
मै राम की भाषा मे
श्री राम का भूखा हूं!

Wednesday, 11 January 2023

इंतकाम

तुम्हारे चले जाने पर
चाहत का इंतकाम क्या लूं,
मै सीता के वनवास पर
राजा राम का नाम क्या लूं,

कैकेई के वरदान पर
मंथरा को इल्जाम क्या लूं,
गोकुल को छोड़ कर
मथुरा मे अब विराम क्या लूं,

अब न कहोगे की 
चाहा नहीं किसी ने,
मै अपनी बेखुदी मे
किसी और का नाम क्यों लूं,

रोना छोड़कर तुम दिव्य की 
खोज में थे निकले,
सिद्धार्थ मै राहुल को
अब पैगाम क्या दूं?

मेरे हो गए थे तुम
मुझमे घुल चुके थे यूं,
तुमसे अलग होकर
खुद का नाम क्या लूं?

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...