Monday, 1 August 2022

बयार

मेरे नथुनों को छूकर 
हल्के से भीतर जाती,
हर मोड़ पर थोड़ा
रुकती, ठहर जाती,

ये ठंडी–सी बयार
बड़ी मद्धिम–सी धार,
सुर मे गुनगुनाती
गले से उतर जाती,

ये राम नाम की बयार
जीवन को तार
हमे झूला झुलाती
गोद मे उठाती और
जीवन है जब तक
आती और जाती
ये राम नाम की बयार!

No comments:

Post a Comment

अधिकार

तुम पर है अधिकार  तुम्हारे होने का चलने का,  तुम्हारे बातें मुझसे करने का  और फिर तुमसे मिलने का,  यह बोलो और फिर शांत रहो मैं सोचूँ और तुम ...