Friday, 11 November 2022

स्थिर

तुम नहीं स्थिर 
तो जग नहीं स्थिर,
तुम हुए जो चुप
तो सब शोर लगता है,
तुम हुए बीमार तो
सब जग ही सोता है,
तुम हुए गुमसुम
तो अखबार मे क्या है?
तुमको लगी टट्टी तो
सड़क ही लंबा है,
तुमको हुई आशक्ति
तो हनुमान बेमतलब,
तुमको हुआ जो भ्रम
तो फिर राम माया है,
तुमने पाला द्वंद तो
रावण ले गया मुझको,
तुमको आया द्वेष
शकुनी भा गया सबको,
हो तुम्हे दुविधा तो
गांधी भी हुए असहाय,
तुमको हुआ अभिमान
तो कैलाश भी है क्षद्म

तुमने बोला राम
तो हुआ आराम,
मन रे तो हुआ आराम!

No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...