Thursday, 24 November 2022

झूठा–गुस्सा

तुम्हारे नाक पर बैठा
तुम्हारा झूठा गुस्सा,
गुस्से मे बैठा हुआ
एक झूठा किस्सा,

न जाने कैसा है
ये फोन वाला रोस,
न जाने देता मुझे क्यों
ये किस बात का दोष,

ये बात करता 
मुझपर एहसान करता है
ये बिहार वाला प्यार
मुझे बदनाम करता है,

ये उलाहना देता
मुझे खुदगर्ज कहता है,
पढ़ने की मेरी आदत
मुझपर कर्ज रखता है,
ये बात मुझसे करके 
मुझको छोड़ देता है,
ये और मुझे लुभाता
तुम्हारा झूठा गुस्सा!😎

No comments:

Post a Comment

अधिकार

तुम पर है अधिकार  तुम्हारे होने का चलने का,  तुम्हारे बातें मुझसे करने का  और फिर तुमसे मिलने का,  यह बोलो और फिर शांत रहो मैं सोचूँ और तुम ...