Monday, 9 January 2023

कुबूल

कुबूल कर लूं मैं
की तुम्हारे जैसा 
कोई और भी है,
कुबूल कर लूं मैं
तुम हो ही नहीं,
कुबूल कर लूं मैं
तुम चली गई,
कुबूल कर लूं आज
की तुम शरीर थी,
कुबूल कैसे हो
राम हैं नहीं?

No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...