बधाई रब की देते हैं,
बधाई राम की सबको
घर आने कि देते हैं,
वो लगाकर फोटो
अपने चश्मे–ए –नूर का,
हमे पैगाम भेजे हैं
उत्सव के सुरूर का,
अपने व्हाट्सएप से आज
दिया जलता दिखाते हैं,
बधाई मुझको देते हैं
मेरे दिल को जलाते हैं!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...