कि उनका दिल बहल जाए,
सचिन-राहुल तो नहीं
जो उनके काम आ जाए,
बिना कीमत के आये हैं
महज पानी सरीखे हैं,
ज़रूरत से नहीं बढ़कर
की शौक से रात कट जाए,
निरा आलू की सब्जी हैं
किसी के साथ बन जाए,
चखना हो नहीं सकते
की वो बदनाम हो जाएं!
झूला झूले रज का कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच करते नृत्य जुगलबंदी...