Thursday, 30 June 2022

सच

क्या सच है
क्या माया?
कौन समझ पाया?
कैसा है सत्य
जो हर कोई भरमाया?
जानता है जो कोई
वो क्या जानता है
वो क्या छोड़ बैठा
वो क्या मांगता है?
यह किस समय की
भूख मे,
हर एक दौड़ता है,
कौन हाथ रोपकर
क्या क्या समेटता है?

क्या रूप है क्या छाया 
यह कौन समझ पाया?

Monday, 27 June 2022

5 Year Plan

कल क्या होगा
कौन जानता,
कल होनी को
कौन मानता,
क्षण भर का
जीवन का सार,
कौन जानता
कल का भार,

कल क्या बीता
वो कौन सुने,
कल क्या पाओगे
कौन जाने?
कल के ही पड़
असमंजस मे
आज खत्म
होता अपार!

strength & weakness

मै करता हूं
राम का काज,
राम की माटी
राम अनाज,
राम की कल थे
राम ही आज,

राम ही हिम्मत
राम ही साज,
राम रुकावट
राम आगाज़,
राम सहारा
राम निवास,
राम समस्या
राम ही बाट,

मुझमे मेरे
राम का हाथ,
मै चलता हूं
राम के साथ,
मै करता हूं
राम के काज!

Saturday, 25 June 2022

Motivation

तुम क्या सोचकर करते हो,
जो करते हो क्यूं करते हो?
क्या आगे क्या पीछे होगा?
क्या ऊपर क्या नीचे होगा?
क्या होगा होने के बाद?
क्या पाया खोने के बाद?

क्या मिलेगा क्या को जायेगा?
क्या रहेगा क्या मिट जायेगा?
क्या तंग करेगा बार–बार?
क्या भूलेगा बन जूना अख़बार?

कौन तुम्हे फिर पूछेगा?
कौन बला तुम्हारी ले लेगा?
कौन करेगा अब तुम पर
उपकार ही थोड़ा बार बार?
कौन उधार देगा तुमको
जब आएगी तुम्हारी
जान पर बात?

कौन राम है, कहां राम हैं
कौन रूप मे हैं भगवान?

Monday, 13 June 2022

सीमा मौसी

एके समझा दे सीमवा
नाही ता हो जाई बवाल,
एके हटा दे सीमवा
हाथ उठ न जाए हमार,

सीम्वा एके चुप करा दे
कही माथा न फिर जाए,
सीम्वा एके उधर बिठा दे
गोली बंदूक न चल जावे,

सीमा तोरे कहले पर
एके बर्दाश्त करत रहली,
सीमवा़ तोरे खातिर बढ़ के
एकर मदद करत रहली,

पईसा–कौड़ी हमरे खातिर
हमरे पैर का जूती हौ,
जमीन–जट्ठा लूटा देब हम
हमके कौन सा कमी हौ,

पर सीमवा बस लिहाज मे
मुंह बंद हम कयिले रहली,
बाप–बहिन और भाय–मतारी
सबके आगे कयिले रहली,

अब सीमवा बस बहुत हो गयल
अब बर्दाश्त के बहरे हौ,
हाथ गोड़ हम बहुत जोड़ली
अब पानी सर के ऊपर हौ!


Sunday, 5 June 2022

शशि

मै धूप मे खड़ा था
पसीना नहीं आ रहा,
मै सागर किनारे बैठा
और लहरों में नहीं जा रहा,

मै तला हुआ रखा पड़ा था
सिरके मे कहां डूबा,
मै नदी किनारे ठहर गया
पर स्नान कहां हुआ?

तुम आए तो शीतल हुआ
मन और मेरा भीतर,
मै हो गया तर राम से
बस राम नाम लेकर!

Thursday, 2 June 2022

राम नाम

वह मुझे बताती
राम का नाम,
वह मुझे सिखाती
राम का काम,
मै देता उसको
जग का ज्ञान,
वह बस दुहराती
राम का नाम,

मै कारण बहुत
बता देता,
मै उंगली पर
गिनवा देता,
मै मोदी नई नीति
कुछ शब्दों मे
समझा देता,
और वह बतलाती
राम का काज,

मै इतिहास 
भी उसे पढ़ा देता,
मै वेद को ही
उधरा देता,
मै बहुत से
पंडित–सा ज्ञानी
किताबें मै
उलटा देता,
वो मुझे बताती
राम कथा,

मै भूगोल की
गोल परत,
खोल मानचित्र
दिखा देता,
मै झगड़ा
करता भारत मे
और world war
सुलझा देता,

वो मुझे अयोध्या ले आती,

मै पराक्रम
के किस्से
शेर शाह के
कह देता,
मै महाराज की
तलवार लिए
खुद कुर्सी पर
चढ जाता,

वो सुंदर काण्ड
बता देती,

मै रा रा रा रा
रा रा रा रा रा रा रा रा रा रा रा रा करता,
वो ‘म’ कहकर
बस सुन लेती!



ठठेरा और कुम्हार

लिखता है
कोई हाथ से,
रज–रज
एक कविता,

ठोक–ठोक के
करता है,
कोई उद्दंड
मूढ़ को ठंडा,

दोनो करते
शीतल जल का
पात्र बनाने
की कोशिश,

पिघलाकर कोई
करे जतन,
पानी मे एक
घोलकर कण,

माटी के
पुतले अनेक,
गुरु देते उनको
रंग भेद,
दोनो के
अन्तर्मन को
करते थोड़ा गहरा,
कुंभकार और ठठेरा!🙏

Sunday, 29 May 2022

असमंजस

मै चाहता
बाजा बजाना,
पर सो रहा
परिवार मेरा,
और चाहता
खाना भी खाना
पर व्रत हुआ
परिवार मेरा,

मै चाहता की
छोड़ आऊ,
नौकरी अंग्रेज वाली,
मै आके
अपने देश खोलूँ
चाय की टपरी ही छोटी,
सबको पिलाऊं
शक्कर मिलाकर
साथ दूं मठरी मलाई,
और क्या पता
मै बन भी जाऊं
मै देश का प्रधामंत्री,
पर गरीब है
परिवार मेरा,

मै सोचता हू
ब्याह लाऊ
छोकरी बेजात वाली,
आंख जिसकी
भूरी–सी हो,
रंग की वो
निखत काली,
वो जो नहीं है
अप्सरा और जो
नहीं सबसे निराली,
पर मौन है
परिवार मेरा,

मुझको लगता
है की भीगूं
बरसात की
पहले पड़े पर,
साइकिल उठा कर
घूम आऊ
सारनाथ और
यूपी कॉलेज,
मै गंगा मैया की
ठंड लेकर
दिन बिता दून
घाट पर ही,
शाम को लौटू
खाकर मलाईयो
दूध वाली,
पर चिंतित बहुत
परिवार मेरा!


नसीहत

पंचायत ३ मे
किरदार कर लो,
किसी और से
शादी भी कर लो,

कुछ और पढ़ते
हो ही क्यूं?
तुम PhD उसमे
तो ही कर लो!

मेरी नसीहत मान लो
पछताओगे वरना बहुत,
”मै” जानता सर्वश्व मेरा
मर जाओगे वरना फखत!

अकेला चना!


अकेला चना भाड़
फोड़ सकता है क्या?
क्या कर लेगा वो अकेले
जो नहीं हुआ?

कितना ढूलकेगा अकेला
कितना बाजेगा घणा?
कितना सोच लेगा वो
जो नहीं कोई सोच सका?


क्या फूल जायेगा इतना
की जैसे सागर समेटेगा?
या पैदल ही चलकर
नाप देगा डांडी की गंगा?

जन का कर आह्वान
वो किसको बुला लेगा?
कर के सबसे काम बेहतर
अंबर झुका लेगा?

कर corruption को अलग
मंत्री हटा देगा,
या स्कूल की करके मरम्मत
सबको रिझा लेगा,

अकेला चना क्या गांधी है
जो सूरज डूबा देगा?
या हनुमान सा आंधी है
जो लंका लगा देगा?
क्या अकेला चना
मोदी कोई है
जो चाय बेचेगा?
या कोई शादी है
वंश बढ़ा देगा?

अकेला चना क्या
मदर टेरेसा है
जो सफेद रंग देगा
या इंदिरा गांधी है
जो बंगला बना देगा?

अकेला चना भाड़ को
फोड़े बिना कैसे सजा देगा?

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...