Friday, 15 April 2022

भटकाव

यह भटक गया है
सटक गया है,
करते–करते
लटक गया है,

कुछ बोल गया है
पट खोल गया है,
मेरी आंखों को 
खटक गया है,

मै जाप करी हूं
कथा सुनी हूं
परसादी दी पर
झटक गया गया है,

मै कहती थी की
रोक लो इसको
पढ़ते–पढ़ते सब
गटक गया है!

इसका होना था
बैंगलोर में ही
यह इलाहाबाद मे
अटक गया है!😇

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