Tuesday, 11 July 2023

संपूर्ण

रह गई 
कुछ कहने वाली 
बातें चार जनों के बीच,
ठहर गई 
कुछ कहने वाली 
जुबां हमारे मन के भीच,

राह मे राम के 
फूल बिछाये,
अपने नीर को 
और बहाए,
हमने घूमे 
चारो धाम,
पर किसको मिलते पूरे राम?

कुछ सोचा 
तो हुआ नहीं,
कुछ पाया 
पर जँचा नहीं,
समझ समेट के 
मुट्ठी भर का,
साधने चले 
बड़ा मैदान,
किसके बस के पूरे राम?


तन्द्रा

बिन समस्या 
ढूंढता समाधान,
भय मे डूबा
अंतर्ध्यान,

कैसी विवेचना 
कैसा ज्ञान,
जब मन से 
मौन हुए सिया राम,

आज न लो 
कोई भी फैसला,
पहले टूटे 
भय की तन्द्रा,
जो विस्मृत 
कर दे हर ज्ञान,
आए किरण 
जो द्वार सुजान 
तब अन्तर की 
खुलती निद्रा!

Saturday, 8 July 2023

पा लूँ

कोई चीज नहीं 
की सबसे पहले 
कर लूँ हासिल,
और छीन लूँ 
किसी और से 
भोंक दूँ तलवार,
खरीद कर 
ला दूँ तुम्हें 
मैं लूट लूँ बाजार,

फिर लगाकर लड़ी
खिड़कियों दरवाजों पर,
करूँ घर का मैं श्रृंगार,
या उठाकर 
रख दूँ तुम्हें 
ऊँचे मर्तबान
जहाँ छू ना सके कोई 
तुम रहो नहीं इंसान,
तुम से लूट कर तुमको 
तुम पर करूँ 
मैं कोई बड़ा एहसान!

Friday, 7 July 2023

गुनाहगार

ज़माने मे कितने ग़म हैं 
हम पर भी हुस्न के 
गहरे सितम हैं,
मशगूल हैं लोग 
हमारी कदर खोने पर,
नाम लेते हमारा 
वो ही क्या कम है?

उनसे मोहब्बत 
करते बहुतेरे,
उनकी इनायत को 
बहुतों को फेरे,
उनकी मुस्कान को 
खेलते हैं खेल,
उनके नजारे को 
ताकतें मुंडेर,
उनकी महफिल मे 
हम ही हैं गुनाहगार,
उनकी उल्फत को झेले
हम मे ही दम है?

पूछते हैं बहुत 
खैरियत की ख़बर,
चुराते बहुत 
उनसे राहों मे नजर,
नाम लेते नहीं 
बिन नज़र को चुराए,
इश्क करते हुए 
कर रहा है असर,
अब फिसल भी ना जाए 
तो कैसे सनम हैं?

हर आहट पर 
आने की उनकी तमन्ना,
हर बात पे उनके 
विचारों की दुनिया,
हर अक्षर पर उनके 
फंसाने चाहूँ लिखना,
यूहीं हर बखत
तराने गुनगुनाना,
अब खुश भी ना हों 
ये कैसी कसम है?

तुनक से तुनक कर
बहस हो रही है,
आने की जाने की 
वजह बढ़ रही है,
खुशामद करे तो 
बहुत-सी तारीफें,
उनके रगों मे
लहू उबाल की है,
मज़ा आ रहा है 
ये नशीला वहम है!


Thursday, 6 July 2023

खाना

आज माँ नहीं 
स्कूल को जाते हुए,
मुँह मे निवाला 
ठुसाते हुए,

आज प्रार्थना से पहले,
पढ़ाई से पहले,
अन्न को अंजुरी 
चढ़ाते हुए,
प्रिन्सिपल सर के 
नियमों को 
स्कूल से बाहर,
पल्लू से सर से 
सुखाते हुए,

आज मेस है 
बर्तन पर बर्तन 
सजाते हुए,
आदेश पर 
omelette बनाते हुए,
आज उत्तम भैया हैं 
खाना बनाकर 
भगाते हुए,
ऑफिस की ड्यूटी 
बजाते हुए,
आज बच्चे 
बड़े हैं 
क्लास मे सैंडविच 
छुपाते और खाते हुए,
मक्के की रोटी भूलते हुए!



Reflection

कभी खुद को 
आईने मे देखो,
ऐसे ही नाहक 
मुस्कराते हुए,

जब किसी बात 
फ़िक्र नहीं करती,
तब देखो खुद को 
इतराते हुए,

उँगलियाँ उठाकर 
लड़ते हुए,
अपनी बात को 
समझाते हुए,
उस आवेग मे
मन डोलाते हुए,
खुद अपनी 
किरण मे
नहाते हुए,

मेरी कविताओं को 
दिल से सुनते हुए,
लाली को गालों पर 
चढ़ते हुए,
डर के 
कोई अपने को 
ढूंढ़ते हुए,
मेरी साथ 
राहों मे चलते हुए,

कभी रुक जाओ 
तुम मुझसे चिढ़ते हुए,
अपनी नाक का 
रंग बदलते हुए,
कभी बाहों मे मेरे 
छोड़ दो खुद को यूहीं 
जब उफन जाती हो 
मुझसे जलते हुए,

आंखों को छोटा 
करके निहारो,
तुम मेरी जब आदतें 
बदलते हुए,
आओ मुझको 
छूकर जरा देख लो,
मुझको अपने 
जैसा सवारते हुए!

राम का हाथ

उसको कौन-सी 
राह सुझाएं 
राम ने जिसको 
छोड़ दिया ?

महावीर की 
चौखट बैठे,
ध्यान किया 
और घर को लौटे,
राम ने उसको
हाथ बढ़ाया,
राम-मधु को 
खूब लुटाया,
पर राम की माया 
मे लिपटाया,
अब उसको
कौन होश मे लाए?

राम का सेवक 
राम की छाया 
राम, राम को ही 
समझाये!

Monday, 3 July 2023

कहाँ नहीं हैं राम?

कहाँ नहीं हैं मेरे राम?

चींटी मे, तिलचट्टे मे
मच्छर मे, गुलदस्ते मे,
बकरी मे और कुत्ते मे
शेर, हिरण और पत्ते मे

लड़की मे और लड़के मे
कर्मचारी और अफसर मे
घर मे और दफ्तर मे
किचन मे और बिस्तर मे,

आम मे, अमरूद मे
संतरे मे, जामुन मे,
भिंडी मे और परवल मे
दहाड़ मे और कलरव मे,

हर दिशा मे, हर क्षेत्र मे
हर रूप मे, हर भेद मे
जहाँ नहीं हैं मेरा काम 
वहाँ भी रहते मेरे राम!🙏



किरण

कौन है किरण?
 
एक भँवरे की गुंजन 
एक तितली की स्पन्दन,
एक चिड़िया की चहक 
एक फूल की महक,
एक सुबह का उजाला 
एक शाम सितारा,

एक बटोही की उम्मीद
एक गुमराह की तकदीर,
एक माँ की तपस्या 
एक पिता की सफलता,
एक भक्त की ज्योति 
एक सीप की मोती,

विज्ञान की कोई खोज 
ज्वार-भाटे की मौज,
कलाम की एक सोच 
Oppenheimer की approach,
न्यूटन की फोटोन 
Einstein की पहचान,

किसी बच्चे की मुस्कान 
खुलती हुई रमजान,
पहाड़ों की चमक
ठहाकों की खनक,
राम का तिलक 
शिवशक्ति की झलक,

गंगा की पवित्रता 
मानसरोवर की शीतलता,
बारिशों का श्रोत 
सूर्यवंशीयों की गोत्र,
कविताओं की पहुंच 
या इतिहास की समझ!

सच्चे दिल सरकर
हर वक्त की बहार,
जीवन का उल्लास 
दोस्तो मे झक्कास,
करोड़ों फूलोँ की मुस्कान 
थोड़ी-सी शैतान,
हल्की-सी परेशान 
जयपुर की शान 
Women with a difference
lady with a class?
Or puffed with a cigarette 
drowned in a glass?

Sunday, 2 July 2023

विशाल-नीरज

जब सूरज नहीं निकलता है 
तब पास तुम्हारे आता हूं,
जब मुस्कान खोजता हूँ 
तो पास तुम्हारे आता हूँ,

जब अपने से मैं तंग हुआ 
संसार देखकर दंग हुआ,
सपनों की झूठी उलझन मे
जब अकेला मै हो जाता हूँ,

जब बचपन की 
गली मे जाना हो,
जब खुलकर 
नाचना गाना हो,
जब दोष कोई 
मुझपर मढ दे,
और संशय कोई 
मिटाना हो,

जब समझ कोई 
पाए न हमे,
जब डर से अपने 
पांव रुके,
जब प्रेम-प्रपंच मे
रास्ते बंद,
जब दिल लग जाये 
किसी के संग,
तब अपनी बात बताने को,

जब राम स्तुति करते हैं 
जब नाम कृष्ण का जपते है,
हनुमान से मस्त कलंदर को 
जब आस-पास ढूंढ़ते हैं,
जब भरत की बातें होती हैं
जब लक्ष्मन रात टहलते हैं,
जब नयन गोविंद के दर्शन को 
एका एक अकुलाते हैं,
हम छोड़ के अपनी कण्ठी-माला
आप से हाथ मिलाते हैं,

जब खेल कोई भी खेलते हैं 
जब TT बैट उठाते हैं,
जब सुबह-सुबह साइकिल लेकर 
हम मान सरोवर जाते हैं,
जब अक्षय कुमार की फ़िल्मों का 
हम कोई गाना गाते हैं,
जब बाबा साहब की तस्वीर
हम दीवारों पर लगाते हैं,
तब जीवन तत्व की मूर्ति को 
हम आपके अंदर पाते हैं,

जब सूरज नहीं निकलता है
तब पास तुम्हारे आते हैं!




Saturday, 1 July 2023

होश

मैं देख सकूँ तुमको 
इसलिए होश मे रहता हूँ,

तुम जाम सजाते हो 
धुएँ के गोल बनाते हो,
छलकाते हो मदिरा 
दिल के राज बताते हो,
मै साथ तुम्हारा दे पाऊँ 
यह जोश मे रहता हूँ,

तुम आँखें छोटी कर लेते 
दोस्तों के दर्द खुला करके,
जादू की झप्पी दे देते 
जब वो रोते बिलख करके,
मै कंधों पर सर को ले पाऊँ 
इसलिए निर्दोष मैं रहता हूँ,

किस्से- गोई मे हँसा-हँसा कर 
पेट मे दम कर देते हो,
अपने गली-मुहल्लों की 
होली मे हमे भिगोते हो,
सूखे चखने खा पाऊँ 
मै रेस मे रहता हूँ,

नाचना तांडव शिव जैसा 
और गाना मीरा का प्रेम भरा,
रास कृष्ण के गोकुल का 
और ज्ञान कुरुक्षेत्र वाला,
मै देख तुम्हारी मधुभक्ति 
बुद्ध-सा तृप्त जो होता हूँ,

मेरे राम का ऐसा रूप देख 
मै चकित बहुत हो जाता हूँ,
मै अपने भ्रम का धनुष तोड़कर 
कुछ और स्थिर हो जाता हूँ,
राम नाम की मदिरा मे
मदहोश मैं रहता हूँ!

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...