Tuesday, 11 July 2023

तन्द्रा

बिन समस्या 
ढूंढता समाधान,
भय मे डूबा
अंतर्ध्यान,

कैसी विवेचना 
कैसा ज्ञान,
जब मन से 
मौन हुए सिया राम,

आज न लो 
कोई भी फैसला,
पहले टूटे 
भय की तन्द्रा,
जो विस्मृत 
कर दे हर ज्ञान,
आए किरण 
जो द्वार सुजान 
तब अन्तर की 
खुलती निद्रा!

No comments:

Post a Comment

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...