Sunday, 25 June 2023

ख़त

कितने ही खत भेजे तुमको 
अक्षर-अक्षर चुन-चुन के,
कितने बीते बरसात के दिन
बूंदे-बूंदे आँगन गिर के,

उन बूँदों के गिरने भर से 
तुम ध्यान नहीं देती हो,
प्रिय तुम मेरे खत पढ़कर 
अब जवाब नहीं देती हो,

कब डोली मे तुम बैठोगी
अंगना अपना छोड़ प्रिये,
किस चौखट पर छन से धर दोगी 
तुम पायल से उन्माद प्रिये,
तुम किसे पुकार कर प्रेम से अब 
भर दोगी फिर से प्राण प्रिये,
तुम मेरे मेघदूत को अब 
बरसात नहीं देती हो,

जब घर से बाहर जाती हो 
तो कौन तुम्हें पहुँचाता है,
तुम्हारे कंधों पर हाथ धरे 
यह कौन पूछकर बढ़ता है,
अब सरोज से कोमल तन पर 
किसका बाल लहलहाता है,
तुम धूप-छाँव के खेल मे अब 
जलने मेरे पाँव नहीं देती हो!


Friday, 23 June 2023

विदाई

अभी छोड़कर जाना है
यह घरबार पुराना है,
यह मेरा नहीं ठिकाना है
बंधन का तो बहाना है,

आज रुके ये आँसू हैं 
आज मित्र हैं गले लगे,
आज शब्द न सूझ रहे 
आंखें चोरी से लुका रहे,

आज नहीं कुछ बोले वो 
आकर चुप हो सोये वो,
मेरे सामान को कंधे धर 
मुझको छोड़कर रोये वो,

उनके हाथ से हाथ छुड़ा 
रोटी कमाने जाना है,
आज ये रीत निभाना है 
आज छोड़कर जाना है!

Monday, 19 June 2023

बोझ

राम का बोझ 
उठाने वाले,
राम के नीचे 
दबा हुआ है,
गलत-सही का 
फैसला करके,
खुद के ऊपर 
लदा हुआ है,

यह कैसे 
धरती को धूरी 
नचा-नचा कर 
थका हुआ है,
आज बहुत 
रोता है बैठकर,
जो राम से पहले 
लड़ा हुआ है,

बोझ राम का 
ढोने वाला,
राम से मुड़कर 
चला हुआ है!

Sunday, 18 June 2023

कामनाएं

कामनाएँ हैं बहुत-सी
बार-बार आती,
यौवन की 
माया को माने
और भड़क जाती,

यह चाहती 
भ्रम तौला जाए
नए-नए रूपों मे,
कुछ आजमाना चाहती 
हर स्वाद को 
कयी स्वरूपों मे,

शृंगार का मद
रखना चाहे 
ये चिरकाल बचाकर, 
अपने उतावलेपन को देखे
प्रतिबिंब सब पर बैठाकर,

पर कहाँ-कहाँ 
प्रतिबिंब की छाया
के पीछे भागे,
मन जहां पहुँच 
को ले जाता 
कामना और आगे,

राम की सैया 
पायी मिट्टी,
उसको ढोकर दौड़े,
मानव शरीर की 
कर पलीद यह 
नाहक बैठा रोये,

राम की मिट्टी 
मे भरने को,
विवेक-जाप 
का पानी,
कामनाएँ 
चमकती अनवरत
होंगी तब बेमानी!

Saturday, 17 June 2023

काज

हर मौके पर 
मुझे काम बता दो,
मुझको मेरे 
राम बता दो,
मुझको कोई 
कोना दे दो,
भजने वाले 
नाम बता दो,

आज बहुत है 
गर्मी घर मे,
आज की बिजली 
खपत बहुत है,
आज कोई 
पंखा बंद करके,
आँगन मे एक 
आम लगा दो,

आज सड़क पर 
है सन्नाटा,
आज नहीं कोई 
सिग्नल जोहता,
आज बंद हैं 
सब दरवाजे,
आज दुकान मे
राजू सोता,
दादी माँ 
आयी ले झोली,
कुछ जामुन के 
गुच्छे खोली,
उनको भी फुटपाथ
मिला क्यूँ?
घर जाने दो 
उनको भी अब,
जामुन के कोई 
दाम बता दो!

आज 'बापू' 
की मूर्ति खड़ी है,
चौराहों पर 
रस्ता देखे,
उनके नीचे 
खेलते बच्चे,
नाचते गाते 
गर्मी टालते,
कहाँ से लाते 
इतनी प्यारी,
वो अपनी 
मुस्कान बता दो,
मुझको भी वो 
आराम बता दो!




Thursday, 15 June 2023

याद

कब तक याद 
रहेगी मुझको,
अपने रोने 
वाली बात,
कब तक 
मन से डरा रहूँगा, 
जिसे न पा 
सकते हो हाथ,

कब तक 
राम से दूर रहूँगा,
जब डूब के 
भक्ति पाऊँगा,
कब तक 
पाँव के 
छालों को 
पंचकोश की 
राह में रोऊँगा?

कौन याद रख
पायेगा दुख,
राम राज्य के 
आने पर?
किसके मन मे 
व्यथा बचेगी 
सब राम चरण 
मे चढ़ाने पर !

Wednesday, 14 June 2023

परजीवी

आज लताए
खोलकर,
तरंग मे सब 
घोलकर,
जिन डालियों 
पर तुम 
लिपटता चाहते हो,

आज हो निर्बाध 
बहना चाहते हो,
आज किनारों 
को उधेड़ना
चाहते हो,

आज मय मे
लिप्त हो,
बोझिल हुए हो,
आज होने तृप्त 
तुम बहने लगे हो,
परजीवी बनकर 
तुम क्यूँ जीना 
चाहते हो,
वनवास देकर 
महल क्यूँ 
लेना चाहते हो?

माया

माया मे थोड़ा 
मन बहला लो,
ओ कैलाश को 
जाने वाले 
मानसरोवर मे
डुबकी लगा लो,

आज का सूरज 
उगता देखो,
आज की तितली 
उड़ते देखो,
आज खिला है 
कमल सरोवर,
आज भ्रमर के 
संग मे गा लो,

आज की परियाँ 
बाग घूमती,
आज की कलियां 
हर घर खिलती,
उनसे कुछ 
मकरंद चुरा लो,

आज दोस्त 
कुछ खेल रहे हैं,
कुछ घूम-टहल
कुछ खाना खाकर,
फिल्म देखकर 
क्रिकेट खेलकर 
जीवन मे उल्लास 
भर रहे,
उनके साथ 
कुछ ताल मिला लो!


बादल

हम बादलो के 
साथ रहकर 
बरसात जानते हैं,
हमें महलों मे
दावत मत दो,
हम सिद्धार्थ का 
उन्माद जानते हैं,
अभी दोपहर तक 
उड़ लेंगे 
पानी पीने से पहले,
हम हवा मे
ऊँचाई का 
अंदाज जानते हैं,

आज जाने दो हमे
गया और सारनाथ 
हम राजाओं की भी 
औकात जानते हैं,
राम का रास्ता 
ढूंढते हैं
जंगल मे पीछे-पीछे 
सत्ता मे रहने वाले
हमें अनजान जानते हैं,
भरत मिलाप का 
सजाते हैं वो समाधि,
पर राम के आने का 
अंजाम जानते हैं,

आज रात हमें 
नींद आ ही नहीं रही,
जानने वाले तुम्हें 
बदनाम जानते हैं,
अँधेरे मे सितारों से 
रोशनी मांगते हैं,
जो पूनम को भी 
अंधकार जानते हैं,

पोथी पढ़ने वाले 
हर्फों को पी रहे हैं,
वो त्याग को भी 
वनवास जानते हैं,
राम को कमियाँ 
गिनाने मे लगे हैं,
पूछने पर कहते हैं
'श्री राम जानते हैं'!

दुविधा-पथ

तुम कहाँ हो 
इन बातों मे,
इरादों मे
जद्दोजहद मे,
उधेड़-बुन मे,

तुमको कहाँ रखूं 
इस अधूरेपन मे,
मोहब्बत के 
अरमान मे,
या सवालों के 
जवाब मे?

नासमझी का 
दौर था वो,
कुछ जाना नहीं 
तुम्हारे सिवा,
किस-किस पहलू 
को सवारूं 
तुम्हारे इन्तेज़ार मे?

आज याद है 
तुम्हारी 
मुझको चिढ़ाती,
राम से मिलवा के 
राम को प्रश्न उठाती,
कौन से गम उठाऊ
कुछ इत्मीनान मे?

अब भेद जाती है 
कुछ बातें पुरानी,
आज समझ भी 
कर रही 
खुलकर नादानी,
अब गांडीव 
को सजा लूँ 
कौन-से बान मे?

अब फ़कीरी की 
फितरत है
राम के दरबार मे,
मन खोजना चाहे
खुद को कैलाश 
के धाम मे,
देश की वेदी पर 
तुमको कौन-सी 
पुकार दूँ?

Tuesday, 13 June 2023

ठहर कर

विचारों को देखो 
ठहर कर ज़रा-सा,
ना बोलो ज़रा भी 
टटोलो जरा-सा,

किसी को उठाकर 
पटकने लगेगा,
किसी से बहुत दूर 
चलने लगेगा,
किसी से हो गुस्सा 
ना बातें करेगा,
नए कर्म कर के 
नए ग़म मोल लेगा,

जो आते विचारों से 
भावों को ना बदले,
तो भावों के आने से 
विचार भी ना बदले,
हम दूर ही बैठे 
अगर उनपर हंस ले,
विचारों के होंगे अंत अपने!

ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...