Saturday, 15 April 2023

ज्वाल

उठता बढ़ता ज्वाल 
ये फैली लपट विकल 
सकल लता जलती 
रस विष के घुलते प्याल,

कर-पद होते आधीन 
करतल करते आसीन 
नभ भुला हुए जमीन 
आज ज्वर में सब तल्लीन,

ज्वाल है काल कपाल 
राम नाम वरदान,
जल बनकर बनते ढाल 
राम ज्वाल पर काल!

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