मातृत्व एक भाव अनेक!
फैसला हक में हमारे कर दो आज इंसान बनकर, कब तक रहोगे मौन मन मे महज चित्कार कर, जो है सभी स्वीकार उसको स्याह कर दो, आज लोगों की जुबाँ की राह ...
मातृत्व एक भाव अनेक!
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