Friday, 22 March 2024

चादर

बिछाकर चांदनी चांद की 
ओढ़कर सितारों का दुकूल,
लगाकर झरोखे की दीवारें 
उठाकर नज़र पर आसमान,

पसारा हाथ, खुली मुट्ठी 
खिली शांति की बेला,
हमारे साथ खेलती हैं 
मिचौली दुग्ध-मेखला,

घूमता है देखकर 
खिलौनों का बड़ा नक्षत्र,
उँगलियों मिला रही बिंदु 
तारों से भरा कैनवस,

मैं मुस्कुराता हूँ 
मिला बचपन का बिछड़ा यार,
मंदिर की पगडण्डी से
चलता साथ आया चांद,

खुली किताब-सी फैली
मुझसे कह रही ईक राग,
कविता कोई लिखती
मेरी आँखों मे काजल रात!

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