Sunday, 3 March 2024

दो साँसे

दो मिनट
कुछ बात करती,
दो से मिलकर 
एक होती दो साँसे,
अतीत की दो साँसे 
भविष्य के कुछ वादे,
आँखों मे नींद को 
दो रात रोकती 
दो साँसे,
दो जिंदगी के दोपहर 
दो शाम की ढ़लान,
दो अलग-थलग सुबह की 
एक जैसी सुबक,
दो परिवार की
दो वक्त की रोटी,
मझला लड़का 
बड़ी बेटी,
दो कन्धों की 
दो जिम्मेदारियां,
एक परिवार की
एक समाज की,
दो अगल-अलग 
राष्ट्र का खाका,
एक राज्य की
एक बनबास की,
एक मथुरा-वृंदावन की
एक कुरुक्षेत्र के द्वन्द की,

दो तर्क-वितर्क मे सिमटी
दो पल मज़ाक की,
हिरोशिमा और नागाशाकी
के बादलों मे गूंजते दर्द की,
दो शहरों मे उगते 
और ढ़लते सूरज की,
दो सौ मिनट मे भी
अधूरी रही बातें 
कई-कई रात की!

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