Monday, 29 May 2023

राम रचित

राम कह रहे सुनने को 
राम सुन रहे कहने को
राम ही शब्द को रचते हैं 
राम धुन मे गाते हैं,

राम ही मधुर बजाते हैं 
राम ही राह बनाते हैं,
राम ही किस्सों के हिस्से 
राम काल बन जाते हैं,

राम रूप कई धरते हैं 
राम हर जगह रहते हैं 🙏


नया

नया शहर है 
अच्छा है,
नए लोग हैं 
अच्छा है,

नई नायिका 
नया-सा मंडप,
नयी मुस्कान 
नया इंसान,
नयी कैन्टीन 
नया है किस्सा 
नया समय है 
नया मेरा हिस्सा,

नई सी इज्जत 
नया मकान 
नई कॉलोनी 
नई पहचान,
नए पड़ोसी 
नया मैदान 
नया है वक्त 
नई सुबह 
नयी शाम,

नयी भरोसा 
नयी दिलासा,
पुराने कंधे 
नए कोई हाथ,
नया सा काम 
नए फलसफे 
नयी दूरी 
नया आलाप,

नयी नींद 
नया छत,
नई मच्छरदानी
नई झिझक 
सभ्यता नई 
जगह नई,
दिल खुश 
और आबाद 
जब तक सब नया,

छोड़कर पुराना 
चलता आगे-आगे 
राम के पीछे-पीछे 
राम हर जगह 
मैं ढूंढ़ता कुछ नया!

फ़ासला

ये तुम्हारे शहर से 
हमारे शहर तक 
बहुत फासला है,
बहुत गाँव हैं 
जिसमें सोने उगे हैं, 
बहुत से शहर हैं 
जो सोकर जगे हैं,
पूलो के कल-पुर्जे 
टूटे पड़ें हैं,
सड़कें हैं कितनी
जो उजड़े हुए हैं,
इन राहों पे चलने के 
बहुत आकड़े हैं!


बहुत से घरों के 
चौखट हैं ऊँचे,
कितने मोहल्लों के 
दीवार कूदें,
चेहरे बहुत हैं 
जो मुँह फेरते हैं,
बहुत से जुबां हैं 
जो कुछ का कुछ 
बोलते हैं,
इन दिलों मे झांकने के 
कम ही आसरे हैं!

Friday, 26 May 2023

बात करते

बात करते बातों मे
श्री राम आ गए,
ओड़िशा मे बंगाल 
बंगाल मे ओड़िशा,
उड़िया मे बोस 
बंगाल मे बाघा जतिन,

सब मे भारत 
भारत मे सब,
मन मे सीता 
मन मे राम आ गए,

आँखें नम हो गई 
जुबां शांत, हाथ नीचे
भृकुटी ढीली 
चेहरे पर मुस्कान 
शब्दों मे विराम आ गया,
बात करते-करते 
कहीं से राम आ गए,

इतिहास भूल गया 
भूगोल सीमित हुआ,
सूरज मद्धिम हुआ 
तारे चमक उठे 
चंद्रमा ठंडा हुआ
नदियाँ माँ हो गई 
चाचा पहाड़ हो गए,
आज सामने पूरा 
ब्रह्मांड आ गया,
मुझको तुम्हारा 
खयाल आ गया,
बातों मे राम का नाम आ गया 🙏

उलझन

तुम होती तो 
सुलझा देती 
क्षण मे मेरे 
असमंजस को,
तुम होती तो 
सहला देती 
मेरे अन्तर के 
क्रंदन को,

तुम होती तो 
मुझे सिखाती 
खाना कैसे खाते हैं,
तुम होती तो 
मुझे बताती 
नमस्कार कब करते हैं?

तुम होती 
देख ही लेती
मेरी बिगाड़ी
आदत को,
तुम होती 
हाथ बढ़ाती 
मेरे लिए 
निवारण को,

तुम नहीं रही 
अब राम ही हैं 
सब मुझको 
राह बताने को!

Wednesday, 24 May 2023

जवाब

क्या है जवाब 
हर एक विचार 
के अंत और शुरुआत का?
क्या है जवाब 
हर तर्क के 
पुनर्निर्माण का,

इसके बाद और 
उसके बाद वाले 
व्यवहार का 
पराधीन और स्वतंत्र 
होने के मध्य 
संघर्ष का धिक्कार का,

क्या है बचा 
जो सामना है 
कर रहा अपवाद का,
क्या जवाब दे रहे हैं 
हम हर घड़ी 
प्रतिवाद का,

क्या है जवाब 
हर कदम पर 
राम के परमार्थ का 
कारण बताएं क्या 
जिसे करते नहीं 
हम जान के,
राम के उपकार 
क्या है जवाब 
बिन राम का?


Monday, 22 May 2023

nuclear bomb

अब हर तरह
हथियार है,
हर हाथ है बटन,
कभी दबा सकता 
कोई कौन-सा ट्रिगर,

अब राम-नाम को 
सीने मे कर धारण,
मरने के भय को 
सहज छोड़कर,
छोटा लगे कोई बम 
चलता रहे जीवन!


spoke

मै रहूं एक तीली-सा
चलते हुए चाक के बीच,
एक बानर-सा रहूं 
जलते हुए लंका मे अभीत,

अंगद जैसा किष्किन्धा मे
कुछ शब्द-सा किताब मे,
इत्र-सा शबाब मे
चिलमन बना हिजाब मे,

राम का बनकर खिले 
राम के रुआब मे,
राम की पहचान बने 
राम की पुकार मे!

Tuesday, 16 May 2023

पारावार

भ्रम का पारावार बड़ा 
बड़ा बहुत विस्तार,
इधर- उधर हर तरफ 
दिखे भ्रम का व्यापार,

भव के ही मझधार 
नहीं आर या पार,
हर शरीर का हिस्सा 
खींच जाता, तनता आकार,

पारावर के पार 
राम राज्य अपरम्पार 
राम नाम पतवार 
फिर सीमित पारावर!

बंधन

बन्धन बिना 
हम उड़ जायेंगे,
हम उड़ना ही 
तो चाहते हैं,

बंधन नहीं तो 
हम गीत गायेंगे,
हम गाना भी 
गुनगुनाते हैं,

बंधन बिना 
नहीं सोचेंगे,
हम झूमना भी 
जानते हैं,

बन्धन बिना 
राम पाएंगे,
हम जपना भी 
तो जानते हैं,

हम राम डाल 
पर बैठने वाले,
राम ही गाकर 
उड़ जायेंगे!

Friday, 12 May 2023

राम बिना


राम बिन है अधूरी 
राम सेतु, राम समाधान,
राम बिन है अधूरी 
राम वजह और राम ज्ञान,

बापू के संवाद
बापू के सलीके,
आज बापू की 
राह टटोलते,
बापू के कुछ बच्चे,

कैसा होगा खान-पान 
कैसी बैठक, कैसा ज्ञान,
कैसा चरखा घूमे 
कैसे सिक्के जोड़ें 
आज विचार का 
होता मंथन,
आज युवा अनजान,

कौन बढ़ाए हाथ 
कौन ही पोंछे आस,
कौन है अपना 
कौन पराया,
किसका खोता मान
कौन बना अनजान,

आज राम के समाधान 
चाहते राम के संतान!




ठिठोली

झूला झूले रज का  कित टूटे और छूटे डोरी प्रिय संग का, यह उच्छ्वास पर निःश्वास, दोलन ऊपर को अंतर मे उल्लास, भय और रोमांच  करते नृत्य  जुगलबंदी...