Thursday, 8 June 2017

कभी phone तुम भी किया करो

 कितनी बार किया है मैंने
कभी फ़ोन तुम भी किया करो 

कभी दिल्ली की बातें बताया करो,
कभी मुंबई शहर में घुमाया करो,
जो करती हो PhD किसी field मे
चाहे उसी का रोब दिखाया करो

युहीं SCROLL करते हुए फ़ोन पर 
कभी मेरा भी नंबर घुमाया करो 

कभी उलझन मे अपनी फसाया करो,
कभी बातों से अपनी डराया करो,
कभी TRAIN की तो कभी rain की 
कोई लम्बे से किस्से सुनाया करो

नासाज़ हो जो की तबियत तुम्हारी,
कभी मुझसे भी दिल बहलाया करो

कभी मम्मी से बातें कराया करो,
कभी गाना भी कोई सुनाया करो,
हर जनमदीन देती थी पहली बधाई,
कभी उसी बात को दुहराया करो

अब तो पैसो की किल्लत नहीं है तुम्हे,
पर जो चाहो तो miss call ही ज़ाया करो

मेरे रोने पे तुम भी तो रो देती थी,
मेरे ख्वाबों मे खुद को पिरो देती थी,
अपनी सखियों से लेती थी मेरी खबर भी,
जानती थी की तुमपर है मेरी नज़र भी

वो यादें अभी जेहन से लगी हैं
कभी झरोखों से परदे हटाया करों

हाँ ! किया था ये वादा मिलेंगे नहीं फिर,
इतनी सिद्दत से न उसको निभाया करो |



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